हरपालपुर-छतरपुर मार्ग पर बसों की मनमानी:
यात्रियों की जान जोखिम में, RTO मौन
हरपालपुर/छतरपुर। जिले के हरपालपुर-छतरपुर मार्ग पर चलने वाली निजी बसें इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर फर्राटा भर रही हैं। परिवहन विभाग (RTO) की अनदेखी के चलते बस ऑपरेटर न केवल खस्ताहाल वाहनों का संचालन कर रहे हैं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है।
कबाड़ के डिब्बे जैसी बसों का संचालन
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि इस मार्ग पर चलने वाली अधिकांश बसों की स्थिति इतनी जर्जर है कि वे सड़क पर चलते समय हिलती नजर आती हैं। यात्रियों के अनुसार, "बसों की हालत देखकर ऐसा लगता है कि ये कभी भी पलट जाएंगी या बीच रास्ते में ही दम तोड़ देंगी।" खिड़कियों के कांच टूटे हुए हैं और सीटें भी बैठने लायक नहीं बची हैं, फिर भी इन बसों का संचालन धड़ल्ले से जारी है।
सवारी गाड़ी या मालगाड़ी?
नियमों के विरुद्ध, इन यात्री बसों की छतों और गैलरी में भारी मात्रा में कमर्शियल लगेज (माल) लादा जा रहा है। सवारियों के बैठने की जगह पर सामान ठूंसने के कारण यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ता है। ओवरलोडिंग के कारण हादसों का अंदेशा बना रहता है, लेकिन बस स्टाफ की दबंगई के आगे यात्री कुछ बोल नहीं पाते।
RTO की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
सूत्रों की मानें तो हरपालपुर-छतरपुर रोड पर परिवहन विभाग की निगरानी शून्य है। विभागीय अधिकारियों द्वारा कभी भी इन खस्ताहाल बसों की फिटनेस जांच नहीं की जाती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आरटीओ विभाग और बस संचालकों के बीच कथित 'सांठगांठ' के कारण इन बसों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
"क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? जर्जर बसें और ऊपर से ओवरलोडिंग, यह सीधे-सीधे मौत को दावत देने जैसा है।" > — एक परेशान यात्री
मुख्य समस्याएं एक नजर में:
- फिटनेस फेल वाहन: बसों की बॉडी और इंजन अत्यंत जर्जर स्थिति में।
- ओवरलोडिंग: यात्रियों के साथ-साथ भारी व्यावसायिक सामान का परिवहन।
- नियमों का उल्लंघन: परमिट और सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी।
- प्रशासनिक उदासीनता: लंबे समय से इस रूट पर कोई चेकिंग अभियान न चलना।
अब देखना यह होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन और परिवहन विभाग कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या यात्रियों को इसी तरह जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ेगा।
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