हरपालपुर: श्रीराम के चैतन्य स्वरूप के दर्शन कर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, ब्रह्माकुमारीज ने दिया मर्यादाओं को जीवन में उतारने का संदेश,
हरपालपुर (छतरपुर)। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव 'रामनवमी' के पावन पर्व पर नगर में आध्यात्मिक उत्साह और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। स्थानीय ब्रह्माकुमारीज 'दिव्य धाम' सेवा केंद्र के तत्वाधान में आयोजित प्रभु श्रीराम और माता सीता की भव्य चैतन्य झांकी ने हर किसी का मन मोह लिया। इस अलौकिक दृश्य के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े और पूरा वातावरण 'जय श्री राम' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
दिव्य झांकी और भक्तिमय वातावरण
कार्यक्रम की शुरुआत मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और माता सीता के चैतन्य स्वरूपों की स्थापना के साथ हुई। सजीव झांकी में प्रभु के शांत और गरिमामयी स्वरूप को देख भक्त भाव-विभोर हो गए। विधि-विधान के साथ महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से आरती उतारी और सुख-समृद्धि की कामना की। आरती के पश्चात उपस्थित जनसमूह को प्रसाद वितरित किया गया।
आदर्श जीवन के लिए 'मर्यादा' अनिवार्य: ब्रह्माकुमारी बहनें
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी केंद्र की बहनों ने उपस्थित समाज को प्रेरणादायी उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि श्रीराम केवल एक नाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति और उत्तम संस्कारों का पुंज हैं।
- मर्यादा का महत्व: बहनों ने बताया कि श्रीराम ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी मर्यादाओं का त्याग नहीं किया। आज के दौर में यदि परिवार और समाज में शांति स्थापित करनी है, तो हमें उनके त्याग, सत्य और कर्तव्यनिष्ठा के गुणों को अपने व्यवहार में लाना होगा।
- सकारात्मक जीवन की ओर कदम: ब्रह्माकुमारी बहनों ने समाज से आह्वान किया कि प्रतिदिन कम से कम एक घंटा सत्संग के लिए निकालें। इससे न केवल मानसिक शांति मिलेगी, बल्कि जीवन के प्रति दृष्टिकोण भी सकारात्मक होगा।
राजयोग साधना से तनाव मुक्ति का संकल्प
कार्यक्रम के विशेष सत्र में जीवन को तनावमुक्त और सुखमय बनाने के लिए 'राजयोग ध्यान' के अभ्यास पर जोर दिया गया। बहनों ने बताया कि राजयोग के माध्यम से हम स्वयं को परमात्मा की शक्ति से जोड़ सकते हैं, जिससे कठिन समय में भी मन स्थिर रहता है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से 10 मिनट का राजयोग अभ्यास किया। पिण्ड दान जैसी शांति का अनुभव करते हुए सभी श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में बुराइयों का त्याग कर श्रीराम के दिखाए सद्मार्ग पर चलेंगे।
मुख्य आकर्षण:
- चैतन्य स्वरूप: सजीव पात्रों द्वारा प्रस्तुत श्रीराम-सीता की मनोहारी छवि।
- सामूहिक ध्यान: शांति और एकाग्रता के लिए राजयोग का अभ्यास।
- संदेश: तनावमुक्त जीवन के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण की आवश्यकता।
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