हरपालपुर: गुटखा बाजार में 'कृत्रिम किल्लत' का खेल, जमाखोरी से आसमान पर पहुंचे दाम
हरपालपुर। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के गुटखा बाजार में इन दिनों जमाखोरी और कालाबाजारी का एक नया खेल देखने को मिल रहा है। वर्चस्व की इस जंग में स्थानीय बड़े दुकानदारों और जमाखोरों ने सिंडिकेट बनाकर आम उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डालना शुरू कर दिया है।
राजश्री के स्टॉक पर 'ताला', नए ब्रांड्स को बढ़ावा
बाजार सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में सबसे ज्यादा बिकने वाले 'राजश्री गुटखा' की कृत्रिम किल्लत पैदा कर दी गई है। स्थानीय जमाखोरों ने भारी मात्रा में राजश्री का स्टॉक दबा लिया है। इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
महंगे दामों पर बिक्री: स्टॉक सीमित दिखाकर राजश्री गुटखा को निर्धारित प्रिंट रेट से कहीं अधिक ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
नए ब्रांड्स की मार्केटिंग: बाजार में आए नए गुटखा ब्रांड्स की बिक्री नहीं हो पा रही थी। ऐसे में नामी ब्रांड्स (जैसे राजश्री) की सप्लाई रोककर ग्राहकों को मजबूरन नए और सस्ते गुटखा ब्रांड्स खरीदने पर विवश किया जा रहा है।
उपभोक्ताओं की मजबूरी का फायदा
जमाखोरी के चलते जहां एक ओर पुराने और स्थापित ब्रांड के लिए शौकीनों को अतिरिक्त पैसे चुकाने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुनाफाखोरी के चक्कर में दुकानदार नए ब्रांड्स को प्रमोट कर रहे हैं ताकि उनका कमीशन और मार्जिन बढ़ सके। हालत यह है कि फुटकर दुकानदार भी अब "माल पीछे से महंगा आ रहा है" का बहाना बनाकर कालाबाजारी को बढ़ावा दे रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
नगर में खुलेआम चल रही इस जमाखोरी और कालाबाजारी ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गोदामों की समय रहते जांच की जाए, तो भारी मात्रा में अवैध स्टॉक बरामद हो सकता है। फिलहाल, जमाखोरों के इस 'नए खेल' से गुटखा बाजार पूरी तरह प्रभावित है और आम आदमी इस आर्थिक लूट का शिकार हो रहा है।
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