मासूम को निगल गई लू, सदमे में गई माँ की जान और अब पत्नी-बेटे की कब्र पर मिला पिता का शव

मासूम को निगल गई लू, सदमे में गई माँ की जान और अब पत्नी-बेटे की कब्र पर मिला पिता का शव

बुन्देली न्यूज़,
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# नियति का क्रूर प्रहार: 11 दिनों में उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार; मासूम को निगल गई लू, सदमे में गई माँ की जान और अब पत्नी-बेटे की कब्र पर मिला पिता का शव,
कहा जाता है कि दुखों का पहाड़ जब टूटता है, तो इंसान संभलने का मौका भी नहीं पाता। लेकिन मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के हरपालपुर के रहने वाले एक परिवार पर नियति ने जो क्रूर प्रहार किया है, उसकी कल्पना मात्र से ही रूह कांप जाती है। उत्तर प्रदेश के महोबा में रह रहे इस परिवार के साथ बीती घटना ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। महज 11 दिनों के भीतर इस हंसते-खेलते परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। अब घर में सिर्फ तीन मासूम और बेसहारा बच्चे बचे हैं, जिनकी रोती-बिलखती आंखें हर आने-जाने वाले से पूछ रही हैं कि आखिर उनका कसूर क्या था?
## कब्रिस्तान का वो मंजर, जिसने सबका कलेजा कँपा दिया
घटनाक्रम के अनुसार, मूल रूप से हरपालपुर (मं.प्र.) के निवासी और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद स्थित चरखारी कस्बे में अपनी ससुराल में रह रहे 40 वर्षीय सुब्हान अहमद लंबे समय से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे थे। शारीरिक रूप से कमजोर सुब्हान मानसिक रूप से तब पूरी तरह टूट गए, जब हाल ही में उन्होंने अपनी पत्नी और 4 साल के मासूम बेटे को खो दिया।
शुक्रवार (5 जून) की तड़के करीब 4 बजे, जब पूरा कस्बा सो रहा था, सुब्हान अहमद अपने घर से बिना किसी को कुछ बताए चुपचाप निकल गए। जब सुबह 6 बजे तक भी वे घर नहीं लौटे, तो परिजनों को चिंता हुई। अनहोनी की आशंका में परिजन उन्हें ढूंढते हुए स्थानीय कब्रिस्तान पहुंचे।
> **कब्रिस्तान का दृश्य:**
> वहां का मंजर देखकर परिजनों और स्थानीय लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। सुब्हान अहमद अपनी पत्नी और बच्चे की अगल-बगल बनी कब्रों के बीच अचेत अवस्था में पड़े हुए थे। उनका एक हाथ अपने लाडले बेटे की कब्र पर और दूसरा हाथ अपनी जीवनसंगिनी की कब्र पर रखा हुआ था। वे अपने परिवार को अंतिम विदाई के बाद भी खुद से दूर नहीं कर पा रहे थे। परिजन उन्हें तुरंत उठाकर स्थानीय अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
## 25 मई से शुरू हुआ मौतों का ये खौफनाक सिलसिला
इस हृदयविदारक दास्तां की शुरुआत बीते 25 मई को हुई थी। उत्तर भारत में चल रही भीषण गर्मी और 'हीट वेव' (लू) ने सुब्हान के सबसे छोटे 4 वर्षीय बेटे हसनैन को अपनी चपेट में ले लिया। गंभीर हालत में मासूम ने दम तोड़ दिया।
 माँ को लगा गहरा सदमा: अपने कलेजे के टुकड़े की मौत की खबर सुनते ही माँ रजिया खातून यह गम बर्दाश्त नहीं कर पाईं। बेटे का शव सामने देख उन्हें ऐसा गहरा सदमा लगा कि मौके पर ही उनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।
 एक साथ उठीं दो अर्थियां: 25 मई का वो दिन पूरे इलाके के लिए कयामत जैसा था, जब एक ही घर से माँ और बेटे की अर्थी एक साथ निकली। दोनों के शवों को एक ही दिन, एक ही कब्रिस्तान में अगल-बगल दफनाया गया था।
 मौत का कारण संदिग्ध: सांप का डंक या टूटा हुआ दिल?
कैंसर पीड़ित सुब्हान अपनी पत्नी और बच्चे की अचानक मौत के बाद भीतर से पूरी तरह मर चुके थे। शुक्रवार को कब्रिस्तान में हुई उनकी मौत के कारणों को लेकर फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है। पुलिस को अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।

 परिजनों/डॉक्टरों का अनुमान |

सर्पदंश / जहरीला कीड़ा | परिजनों के मुताबिक, सुब्हान के पैर पर एक अजीब सा निशान मिला है। आशंका है कि भोर के समय कब्र पर बेसुध लेटे रहने के दौरान उन्हें किसी जहरीले सांप या कीड़े ने काट लिया होगा। |


कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) डॉक्टरों का एक अनुमान यह भी है कि सुब्हान पहले से ही कैंसर से कमजोर थे। पत्नी और बेटे को खोने के असहनीय मानसिक सदमे और अवसाद के कारण उनका दिल बैठ गया होगा। |

अब हमेशा के लिए अनाथ हो गए तीन मासूम, सरकार से मदद की गुहार
11 दिनों के भीतर एक ही घर से तीन अर्थियां उठने के बाद पूरे हरपालपुर और चरखारी इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। इस विनाशकारी घटना के बाद सुब्हान के तीन बच्चे हमेशा के लिए अनाथ और बेसहारा हो गए हैं:
 1. सैफ (17 वर्ष) - जो अब इस टूटे हुए परिवार में सबसे बड़ा है।
 2. रोशनी (14 वर्ष)- जिसकी आँखों के आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे।
 3.आलिया (11 वर्ष)- जो इतनी छोटी है कि शायद अभी इस पूरे नुकसान को समझ भी नहीं पा रही है।
इन बच्चों के सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है और आगे की जिंदगी पालने के लिए कोई सहारा नहीं बचा है। इस दुखद मोड़ पर अब स्थानीय समाजसेवियों और ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से इन बेसहारा बच्चों के भरण-पोषण, मुफ्त शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तत्काल बड़ी आर्थिक सहायता प्रदान करने की गुहार लगाई है।
यह घटना इस बात का गवाह है कि कभी-कभी हकीकत, किसी भी काल्पनिक त्रासदी से कहीं ज्यादा दर्दनाक और क्रूर हो सकती है।

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