विधायक का कहना है कि इस कृत्य से न केवल उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है, बल्कि जनता को गुमराह कर राजनीतिक फायदे उठाने की भी साजिश रची जा रही है।
इस मामले से साफ है कि फर्जीवाड़े का खेल अब सत्ता और प्रशासन के गलियारों तक पहुंच चुका है। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो रही है और जिम्मेदार लोग कब तक चुप्पी साधे रहेंगे?
वहीं, आम जनता के बीच भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधियों तक के नाम का दुरुपयोग इस तरह से खुलेआम हो सकता है, तो आम नागरिक की सुरक्षा और विश्वास का क्या होगा?
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