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MP में वित्तीय अनुशासन पर बड़ी चोट: बैंक ऑफ बड़ौदा 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट

MP में वित्तीय अनुशासन पर बड़ी चोट: बैंक ऑफ बड़ौदा 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट

भोपाल: मध्य प्रदेश शासन ने बैंकिंग जगत और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा करते हुए एक कड़ा फैसला लिया है। प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठित बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) को आगामी 5 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। सरकार के इस सख्त रुख के बाद अब राज्य का कोई भी सरकारी विभाग, निगम या मंडल बैंक के साथ किसी भी प्रकार का नया वित्तीय लेन-देन नहीं कर सकेगा।

क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?

​इस प्रतिबंध का मुख्य कारण मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के फंड प्रबंधन में बरती गई भारी अनियमितता और लापरवाही को माना जा रहा है।

  • 175 करोड़ का मामला: शासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बैंक के पास योजना के ₹175 करोड़ से अधिक की राशि जमा थी। इस फंड के प्रबंधन में बैंक ने न केवल शासन के निर्देशों की अनदेखी की, बल्कि प्रक्रियात्मक त्रुटियाँ भी कीं।
  • निर्देशों की अवहेलना: वित्त विभाग ने पाया कि बैंक को बार-बार चेतावनी और निर्देश देने के बावजूद, किसान कल्याण योजना के लाभार्थियों तक राशि पहुँचाने और खाते के प्रबंधन में बैंक का रवैया संतोषजनक नहीं रहा।
  • ब्याज और पारदर्शिता: सूत्रों के अनुसार, फंड पर मिलने वाले ब्याज और हस्तांतरण की गति को लेकर भी सरकार और बैंक के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।

सरकार के आदेश का प्रभाव

​वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद इसके दूरगामी परिणाम होंगे:

  1. नये खातों पर रोक: मध्य प्रदेश का कोई भी सरकारी विभाग अब बैंक ऑफ बड़ौदा में नया खाता नहीं खोल सकेगा।
  2. लेन-देन बंद: मौजूदा खातों से केवल फंड निकासी या ट्रांसफर की अनुमति होगी, लेकिन नई सरकारी जमा राशि (FDR या चालू खाते) इस बैंक में नहीं रखी जाएगी।
  3. सरकारी योजनाओं से बाहर: भविष्य में होने वाले बड़े सरकारी टेंडरों और भुगतान गेटवे की दौड़ से बैंक ऑफ बड़ौदा बाहर हो गया है।

बैंकों को सख्त संदेश

​यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश सरकार ने किसी बैंक पर ऐसी कार्रवाई की है, लेकिन 'बैंक ऑफ बड़ौदा' जैसे बड़े संस्थान पर 5 साल का प्रतिबंध एक स्पष्ट संदेश है कि सार्वजनिक धन के प्रबंधन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का मानना है कि किसानों के हक का पैसा समय पर और पारदर्शी तरीके से वितरित होना चाहिए, जिसमें बैंक की भूमिका सबसे अहम होती है।

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