मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल: हरपालपुर में वजन कश समिति और दाल मिल मालिकों के बीच विवाद गहराया,
हरपालपुर (छतरपुर) | स्थानीय कृषि उपज मंडी में मज़दूरों के शोषण और दबंगई का एक गंभीर मामला सामने आया है। नव वजन कश सामाजिक समिति, हरपालपुर द्वारा मंडी बोर्ड भोपाल को सौंपे गए शिकायती आवेदन के बाद, जाँच के लिए पहुँची 5 सदस्यीय टीम की चुप्पी ने अब नए विवाद को जन्म दे दिया है। समिति का आरोप है कि रसूखदार फर्म मालिकों के प्रभाव में आकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है।
विवाद की जड़: 'नियमों को ठेंगा दिखाते पिता-पुत्र की फर्में'
हरपालपुर कृषि उपज मंडी में लगभग 42 व्यापारी कार्यरत हैं, जो मंडी अधिनियम एवं नियमों का पालन करते हुए अपना व्यवसाय चला रहे हैं। लेकिन विवाद का केंद्र साहू दाल उद्योग और साहू एण्ड ब्रदर्स नामक दो फर्में हैं। इन दोनों फर्मों के मालिक रिश्ते में पिता-पुत्र हैं। आरोप है कि ये दोनों फर्में न तो मंडी अधिनियम का पालन करती हैं और न ही माननीय हाईकोर्ट के आदेशों को मानती हैं।
समिति के अध्यक्ष श्री मायादीन अहिरवार का कहना है कि ये व्यापारी पिछले 3 से 4 सालों से वजन कशों (मज़दूरों) की वाजिब मज़दूरी रोककर बैठे हैं। मज़दूरों द्वारा बार-बार मंडी समिति और जिला प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायत के मुख्य बिंदु:
* मज़दूरी का भुगतान न करना: पिछले 4 वर्षों से मज़दूरों का पारिश्रमिक नहीं दिया गया है।
* अमानवीय व्यवहार: मज़दूरों के साथ गाली-गलौज और उन्हें काम से रोकना।
* अधिकारियों का संरक्षण: आरोप है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण में यह खेल चल रहा है और मोटी रकम लेकर शिकायतों को दबा दिया जाता है।
* कोर्ट की अवमानना: माननीय हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद मज़दूरों को उनका हक नहीं दिया जा रहा।
जाँच टीम की संदिग्ध भूमिका: 'कैमरे से दूरी'
मंडी बोर्ड भोपाल द्वारा भेजी गई 5 सदस्यीय जाँच टीम, जिसका नेतृत्व रीना जी कर रही थीं, हरपालपुर पहुँची। टीम ने मज़दूरों की व्यथा तो सुनी, लेकिन जब मीडिया ने उनका पक्ष जानना चाहा, तो टीम प्रमुख ने कैमरे के सामने बोलने से साफ इनकार कर दिया। सरकारी अधिकारियों की यह चुप्पी और रहस्यमयी व्यवहार मज़दूरों के बीच भारी अविश्वास पैदा कर रहा है।
सेटिंग की आशंका और मज़दूरों का आक्रोश
मंडी परिसर में दबी जुबान में चर्चा है कि रसूखदार मिल मालिकों और जाँच टीम के बीच 'भीतरी सेटिंग' के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि अधिकारी मीडिया से बचकर इस पूरे मामले को रफा-दफा करने की फिराक में हैं, ताकि रसूखदार व्यापारियों को बचाया जा सके।
समिति की अंतिम चेतावनी: 'अब सीधे हाईकोर्ट में होगी लड़ाई'
वजन कश समिति के अध्यक्ष मायादीन अहिरवार ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है:
> "हम गरीब मज़दूर हैं, लेकिन कमजोर नहीं। अगर इस बार भी जाँच के नाम पर खानापूर्ति हुई या वरिष्ठ अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के चलते मामले को दबाया, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। मज़दूरों के हक के लिए अब हम इस पूरे प्रकरण को माननीय हाईकोर्ट लेकर जाएंगे।"
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ब्यूरो रिपोर्ट, हरपालपुर।
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