महाघोटाला: आंगनबाड़ी के नौनिहालों के निवाले पर 'डाका', भोपाल तक सेटिंग में जुटे भ्रष्ट अफसर!
विशेष संवाददाता, छतरपुर।
छतरपुर जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग में भ्रष्टाचार की एक ऐसी 'दीमक' लग चुकी है, जिसने मासूम नौनिहालों के हक को पूरी तरह खोखला कर दिया है। जिले में पदस्थ प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) दिनेश दीक्षित के कारनामों की गूंज अब छतरपुर की गलियों से लेकर राजधानी भोपाल के प्रशासनिक गलियारों तक सुनाई दे रही है। आरोप है कि बिना किसी धरातलीय सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) के, सिर्फ कागजों पर 'गुड़-चिक्की' बांटकर सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया गया है।
बकस्वाहा और बड़ामलहरा में 'फर्जीवाड़े की आंधी'
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस महाघोटाले का मुख्य केंद्र बकस्वाहा और बड़ामलहरा विकासखंड की आंगनबाड़ियां बनीं। चालू वर्ष के शुरुआती महीनों (जनवरी से मार्च) के दौरान इन दोनों क्षेत्रों में गुड़-चिक्की सप्लाई के नाम पर कथित रूप से फर्जी बिल तैयार किए गए।
हैरानी की बात यह है कि बिना किसी ठोस जांच और वेरिफिकेशन के, जिम्मेदार अधिकारी ने अपनी कलम चलाकर इन फर्जी बिलों का धड़ल्ले से भुगतान भी कर दिया। आरोप लग रहे हैं कि मासूम बच्चों के पेट में पोषण आहार पहुंचा या नहीं, इससे बेपरवाह होकर सिर्फ 'कमीशन के खेल' को अंजाम दिया गया।
सागर से भोपाल तक 'संदेह के घेरे' में बड़े नाम
अखबारों और सोशल मीडिया की सुर्खियां बने इस 'चिक्की-कांड' की आंच सिर्फ छतरपुर तक सीमित नहीं है। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि सागर संभाग के सह-संचालक (श्री प्रजापति) की भूमिका भी इस पूरे मामले में संदिग्ध है।
मंत्री जी के विशेष सहायक की चौखट पर 'हाजिरी'
सूत्रों का दावा है कि प्रदेश में चल रहे तबादलों के दौर के बीच अपनी कुर्सी बचाने के लिए दिनेश दीक्षित ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। खबरों के मुताबिक, चार दिन पहले ही वे महिला एवं बाल विकास मंत्री के विशेष सहायक की चौखट पर माथा टेककर लौटे हैं। विभागीय गलियारों में यह चर्चा आम है कि अधिकारी खुलेआम अपनी ऊंची पहुंच का धौंस जमा रहे हैं और कह रहे हैं कि बड़ी 'सेवा' लगाने के कारण उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
EOW में शिकायत दर्ज, जांच प्रभावित होने की आशंका
इस पूरे मामले की शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में दर्ज हो चुकी है। लेकिन जागरूक नागरिकों और जानकारों का सवाल है कि यदि बच्चों का निवाला डकारने के आरोपी अधिकारी अपने पद पर जमे रहेंगे, तो क्या EOW की जांच निष्पक्ष हो पाएगी? क्या महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों और सबूतों को खुर्द-बुर्द नहीं कर दिया जाएगा?
सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर सवाल
एक तरफ सूबे की सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति का दम भरती है और भ्रष्ट अफसरों पर कड़ी कार्रवाई का दावा करती है। वहीं दूसरी तरफ, ऐसे गंभीर आरोपों से घिरे दागी अधिकारी को अभयदान मिलना सरकार की साख पर भी सवालिया निशान खड़े कर रहा है।
जनता की मांग: छतरपुर के जागरूक नागरिकों और जनता ने पुरजोर मांग की है कि बकस्वाहा और बड़ामलहरा समेत कई ब्लॉकों में हुए इस गुड़-चिक्की घोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए, ताकि EOW की जांच प्रभावित न हो सके और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
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