बिलहरी का 'भ्रष्टाचारी' सचिव: सरकारी जमीनों को निगल रहा भू-माफिया तंत्र; थाने में दर्ज हैं मुकदमे, फिर भी मेहरबान है प्रशासन
नौगांव। मध्य प्रदेश शासन की जमीनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वही अब रक्षक से भक्षक बन बैठे हैं। जनपद पंचायत नौगांव के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बिलहरी से भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की एक ऐसी सनसनीखेज तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
बिलहरी में पदस्थ पंचायत सचिव रविशंकर द्विवेदी और उनके करीबियों पर राजनैतिक संरक्षण की आड़ में शासकीय भूमियों की 'डकैती' डालने और फर्जी दस्तावेजों (कूटरचना) के सहारे करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति हड़पने के गंभीर आरोप लगे हैं।
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तहसीलदार का आदेश रद्दी की टोकरी में!
भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा सबूत ग्राम बिलहरी के खसरा नंबर 104 (रकबा 0.194 हेक्टेयर) में देखने को मिलता है। यह जमीन मध्य प्रदेश शासन की आबादी के रूप में दर्ज है और प्राथमिक विद्यालय से लगी हुई है। इस कीमती जमीन के 0.020 आरे हिस्से पर ममता पत्नी मनोज सेन के नाम से अवैध रूप से आलीशान पक्का भवन तान दिया गया।
इस घपलेबाजी पर तहसीलदार नौगांव ने संज्ञान लेते हुए प्रकरण क्रमांक 227/अ-68/2020-21 में दिनांक 20/07/2021 को ही अवैध कब्जा ढहाने (बेदखली) का आदेश सुनाया था। साथ ही, फर्जी कागजात तैयार करने के जुर्म में भ्रष्टाचारी सचिव रविशंकर द्विवेदी पर कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। लेकिन अफ़सोस, साहब के रसूख के आगे तहसीलदार का यह आदेश पिछले 5 सालों से रद्दी की टोकरी की शोभा बढ़ा रहा है।
फोरलेन से लेकर सहकारी समिति तक... कहाँ-कहाँ निगली सरकारी जमीन?
भ्रष्टाचारी सिंडिकेट का जाल सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि पूरे इलाके में फैला हुआ है। शिकायत के अनुसार, सरकारी जमीनों को कूट रचित दस्तावेजों के जरिए कौड़ियों के दाम पर ठिकाने लगाया जा रहा है:
मप्र शासन सिगंरावनकला (खसरा नं0 662): सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से निजी पक्की दुकानें खड़ी कर दी गईं और किराया वसूला जा रहा है।
बिलहरी (खसरा नं0 40 और 2025): इन शासकीय नंबरों पर अवैध रूप से बाउंड्रीवॉल और दुकानें बनाकर कब्जा पक्का कर लिया गया है।
सहकारी समिति के सामने (खसरा नं0 1/59): नौगांव बृहताकार सहकारी समिति के ठीक सामने की बेशकीमती व्यावसायिक शासकीय भूमि पर भी अवैध बाउंड्री तान दी गई।
नयागांव फोरलेन (खसरा नं0 72/1, 72/2/2): इस मुख्य मार्ग पर नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से ढाबा संचालित किया जा रहा है, जिससे हर महीने लाखों की काली कमाई हो रही है।
आपराधिक रिकॉर्ड वाले सचिव पर किसका वरदहस्त?
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव रविशंकर द्विवेदी ने अपने पद का ऐसा दुरुपयोग किया है जिससे शासन को करोड़ों का चूना लगा है और खुद की अकूत काली संपत्ति (मकान और दुकानें) खड़ी कर ली है।
थाने में दर्ज हैं कई केस, इलाके में दहशत
शिकायत में साफ तौर पर उल्लेख है कि यह सचिव और उसके साथी आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। इनके खिलाफ नौगांव थाने में पहले से ही कई गंभीर मामले दर्ज हैं। रसूख, पैसे और कथित राजनैतिक संरक्षण के कारण इलाके में इनका ऐसा खौफ है कि कोई आम नागरिक इनके खिलाफ मुंह खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। यही वजह है कि बेखौफ होकर शासकीय जमीनों पर डाका डाला जा रहा है।
जनता की मांग: तुरंत हो सस्पेंशन और जेल की कार्रवाई
इस महाभ्रष्टाचार को लेकर अब ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से मांग की जा रही है कि:
ऐसे भ्रष्ट और दागी पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से पद से निलंबित (सस्पेंड) किया जाए।
तहसीलदार के 5 साल पुराने आदेश का पालन करते हुए सभी खसरा नंबरों से अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया जाए।
शासकीय दस्तावेजों की कूट रचना (Forging) करने और पद के दुरुपयोग के मामले में सचिव पर FIR दर्ज कर जेल भेजा जाए।
बड़ा सवाल: जब मुख्यमंत्री और प्रशासन 'भू-माफियाओं' और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीटते हैं, तो नौगांव का यह 'दागी' सचिव अब तक जेल के पीछे क्यों नहीं है? देखना होगा कि इस खुलासे के बाद प्रशासन जागता है या भ्रष्टाचार की यह फाइल फिर दबा दी जाती है।
नोट इस खबर के प्रायोजक है दीपांश महाराज बिलहरी
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