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बुन्देली न्यूज़

HARPALPUR, MADHYA PRADESH, India

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महोबा: बगरोनी के खेत में 'प्रकट' हुई हनुमान प्रतिमा, आस्था या सुनियोजित साजिश?



महोबा/महौबकंठ:

जनपद के थाना महौबकंठ अंतर्गत ग्राम बगरोनी में उस समय हलचल मच गई, जब एक खेत में हनुमान जी की मूर्ति निकलने की सूचना आग की तरह फैल गई। नवरात्रि के पावन पर्व के बीच हुई इस घटना को जहाँ कुछ ग्रामीण 'दैवीय चमत्कार' मान रहे हैं, वहीं सजग नागरिकों और प्रत्यक्षदर्शियों ने इस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

​मिली जानकारी के अनुसार, बगरोनी गाँव के एक खेत में जमीन से हनुमान जी की प्रतिमा प्रकट होने का दावा किया गया। सूचना मिलते ही आस-पास के लोग दर्शन के लिए जुटने लगे। हालांकि, मूर्ति की चमक और बनावट को देखकर कई लोगों का संदेह गहरा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मूर्ति को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि इसे हाल ही में बनाया गया है और किसी ने जानबूझकर इसे जमीन में दबाकर 'प्रकट' होने का स्वांग रचा है।

आस्था के साथ खिलवाड़ पर आक्रोश

​धार्मिक मर्यादाओं को लेकर सजग ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह वास्तव में प्राचीन प्रतिमा है जो धरती से निकली है, तो यह गौरव का विषय है और यहाँ अविलंब मंदिर निर्माण होना चाहिए। लेकिन, यदि नवरात्रि के पवित्र समय में किसी ने स्वार्थ या धार्मिक मजाक के उद्देश्य से नई मूर्ति यहाँ रखी है, तो यह हिंदू धर्म और करोड़ों भक्तों की आस्था का अपमान है।

​"धर्म आस्था का विषय है, व्यापार या मनोरंजन का नहीं। यदि कोई जानबूझकर लोगों की भावनाओं से खेल रहा है, तो उस पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।" — स्थानीय नागरिक


मुख्य चिंताएं और मांगें:

  • प्रशासनिक जांच: क्या यह किसी की निजी जमीन पर कब्जा करने या चढ़ावा इकट्ठा करने की साजिश है?
  • पुरातत्व विभाग की भूमिका: क्या मूर्ति की प्राचीनता की जांच के लिए विशेषज्ञों को बुलाया जाएगा?
  • दोषियों पर कार्रवाई: यदि यह कृत्य जानबूझकर किया गया है, तो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के जुर्म में उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

LPG का असली 'विकल्प' है DME गैस: संकट का समाधान और भविष्य की ऊर्जा

​भारत में LPG (रसोई गैस) की बढ़ती कीमतों और आयात पर अत्यधिक निर्भरता के बीच DME (डाइमिथाइल ईथर) एक क्रांतिकारी समाधान बनकर उभरा है। यह केवल एक गैस नहीं, बल्कि LPG की कमियों को दूर करने का एक वैज्ञानिक तरीका है।

1. LPG की कमी को DME कैसे पूरा करेगी?

​LPG मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण है, जो कच्चे तेल (Crude Oil) के शोधन से मिलती है। चूँकि भारत कच्चा तेल बाहर से मंगाता है, इसलिए LPG की कमी और महंगाई बनी रहती है। DME इस कमी को निम्न तरीकों से पूरा करेगी:

  • 20% ब्लेंडिंग (मिश्रण): शुरुआती स्तर पर LPG में 20% तक DME मिलाया जा सकता है। इसके लिए मौजूदा चूल्हों या सिलेंडरों में किसी बदलाव की जरूरत नहीं होती। इससे 20% LPG की बचत सीधे तौर पर होगी।
  • स्वदेशी उत्पादन: LPG के विपरीत, DME को भारत में मौजूद खराब श्रेणी के कोयले (Low-grade Coal), कृषि अवशेष (पराली) और बायोमास से बनाया जा सकता है। इससे हमें अरब देशों से गैस मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
  • लागत में कमी: घरेलू स्रोतों से उत्पादन होने के कारण, DME की उत्पादन लागत LPG की तुलना में काफी कम बैठती है, जिससे आम आदमी को सस्ता सिलेंडर मिल सकेगा।

2. तकनीकी रूप से LPG के समान (Compatibility)

​LPG और DME के भौतिक गुण लगभग एक जैसे हैं:

  • दबाव (Pressure): जिस दबाव पर LPG तरल बनती है, लगभग उसी दबाव पर DME भी तरल हो जाती है। यानी, जो सिलेंडर आज आपके घर में है, उसी में DME भरी जा सकती है।
  • परिवहन: इसे ले जाने के लिए नए टैंकरों या पाइपलाइनों की जरूरत नहीं है; मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर ही काम आएगा।

3. 'कुकिंग फ्यूल' के रूप में DME के विशेष फायदे

​LPG की तुलना में DME रसोई के लिए क्यों बेहतर है?

  1. अधिक सुरक्षित: DME की 'ज्वलनशीलता सीमा' (Flammability limit) LPG से अलग है, जिससे रिसाव होने पर आग लगने का खतरा थोड़ा कम होता है।
  2. पर्यावरण के अनुकूल: जलते समय यह शून्य धुआं पैदा करती है। यदि इसे बायोमास से बनाया जाए (Bio-DME), तो यह पूरी तरह से 'कार्बन न्यूट्रल' ईंधन बन जाता है।
  3. ऊर्जा घनत्व: हालांकि इसका ऊर्जा घनत्व LPG से थोड़ा कम है, लेकिन इसकी दहन क्षमता (Burning Efficiency) इतनी अधिक है कि यह खाना पकाने में लगभग बराबर का परिणाम देती है।

4. भारत सरकार का 'DME मिशन'

​भारत सरकार (NITI Aayog के माध्यम से) एक ऐसी योजना पर काम कर रही है जिसके तहत:

  • ​बड़े पैमाने पर Coal-to-DME प्लांट लगाए जा रहे हैं।
  • ​गाँवों में जहाँ LPG की पहुँच कम है, वहाँ सीधे 'DME ग्रिड' बनाने पर विचार हो रहा है।
  • आत्मनिर्भर भारत: इससे हम ऊर्जा के क्षेत्र में विदेशों के बजाय खुद पर निर्भर होंगे।



होनहार धैर्य राजपूत ने रचा इतिहास: मात्र ढाई महीने की कोचिंग और कड़ी मेहनत से सैनिक स्कूल परीक्षा में लहराया परचम

​होनहार धैर्य राजपूत ने रचा इतिहास: मात्र ढाई महीने की कोचिंग और कड़ी मेहनत से सैनिक स्कूल परीक्षा में लहराया परचम
​हरपालपुर। प्रतिभा और सही मार्गदर्शन जब मिल जाते हैं, तो सफलता निश्चित हो जाती है। इसे सच कर दिखाया है नगर के होनहार छात्र धैर्य राजपूत ने। तक्षशिला पब्लिक मॉडल स्कूल के छात्र धैर्य ने अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा में 300 में से 257 अंक हासिल कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है।
​ढाई महीने की तैयारी और कोचिंग का कमाल
​धैर्य की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने मात्र ढाई महीने की संक्षिप्त अवधि में सघन तैयारी की। उनकी इस उपलब्धि में उनकी कोचिंग टीचर स्नेहा मैडम का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा। स्नेहा मैडम के कुशल मार्गदर्शन, विशेष शिक्षण तकनीक और धैर्य की दिन-रात की मेहनत ने इस कठिन परीक्षा में शानदार सफलता दिलाई है।
​धैर्य, हरपालपुर निवासी श्रीमती अंजू राजपूत एवं डॉ. धर्मेंद्र सिंह राजपूत (पशु चिकित्सा अधिकारी, चौका गाँव, उत्तर प्रदेश) के सुपुत्र हैं।
​क्षेत्र में खुशी की लहर
​धैर्य के चयन से न केवल उनके परिवार में हर्ष का माहौल है, बल्कि तक्षशिला पब्लिक मॉडल स्कूल और पूरे नगर का नाम रोशन हुआ है। विद्यालय प्रबंधन ने इसे अन्य छात्र-छात्राओं के लिए एक मिसाल बताया है।
​"धैर्य की लगन और स्नेहा मैडम के सही मार्गदर्शन ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची, तो कम समय में भी बड़ी सफलता प्राप्त की जा सकती है। उनके चयन ने हम सभी को गौरवान्वित किया है।"
— विद्यालय प्रशासन, तक्षशिला पब्लिक मॉडल स्कूल
​गुरुजनों और माता-पिता का मान बढ़ाया
​नगरवासियों और विद्यालय परिवार ने धैर्य के उज्जवल भविष्य की कामना की है। उनकी इस उपलब्धि पर गुरुजनों ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि धैर्य ने न केवल अपने माता-पिता का सपना पूरा किया है, बल्कि क्षेत्र के अन्य बच्चों को भी कड़ी मेहनत और सही ट्यूशन-कोचिंग के महत्व से अवगत कराया है।
हरपालपुर: गुटखा बाजार में 'कृत्रिम किल्लत' का खेल, जमाखोरी से आसमान पर पहुंचे दाम
हरपालपुर। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के गुटखा बाजार में इन दिनों जमाखोरी और कालाबाजारी का एक नया खेल देखने को मिल रहा है। वर्चस्व की इस जंग में स्थानीय बड़े दुकानदारों और जमाखोरों ने सिंडिकेट बनाकर आम उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डालना शुरू कर दिया है।
राजश्री के स्टॉक पर 'ताला', नए ब्रांड्स को बढ़ावा
बाजार सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में सबसे ज्यादा बिकने वाले 'राजश्री गुटखा' की कृत्रिम किल्लत पैदा कर दी गई है। स्थानीय जमाखोरों ने भारी मात्रा में राजश्री का स्टॉक दबा लिया है। इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
 महंगे दामों पर बिक्री: स्टॉक सीमित दिखाकर राजश्री गुटखा को निर्धारित प्रिंट रेट से कहीं अधिक ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
  नए ब्रांड्स की मार्केटिंग: बाजार में आए नए गुटखा ब्रांड्स की बिक्री नहीं हो पा रही थी। ऐसे में नामी ब्रांड्स (जैसे राजश्री) की सप्लाई रोककर ग्राहकों को मजबूरन नए और सस्ते गुटखा ब्रांड्स खरीदने पर विवश किया जा रहा है।
उपभोक्ताओं की मजबूरी का फायदा
जमाखोरी के चलते जहां एक ओर पुराने और स्थापित ब्रांड के लिए शौकीनों को अतिरिक्त पैसे चुकाने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुनाफाखोरी के चक्कर में दुकानदार नए ब्रांड्स को प्रमोट कर रहे हैं ताकि उनका कमीशन और मार्जिन बढ़ सके। हालत यह है कि फुटकर दुकानदार भी अब "माल पीछे से महंगा आ रहा है" का बहाना बनाकर कालाबाजारी को बढ़ावा दे रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
नगर में खुलेआम चल रही इस जमाखोरी और कालाबाजारी ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गोदामों की समय रहते जांच की जाए, तो भारी मात्रा में अवैध स्टॉक बरामद हो सकता है। फिलहाल, जमाखोरों के इस 'नए खेल' से गुटखा बाजार पूरी तरह प्रभावित है और आम आदमी इस आर्थिक लूट का शिकार हो रहा है।
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हरपालपुर पुलिस की बड़ी कामयाबी: साइबर ठगी के ₹30,000 वापस कराए, पीड़ित ने थाने में बांटी मिठाई

हरपालपुर: साइबर ठगी का शिकार हुई एक महिला के लिए हरपालपुर पुलिस मददगार साबित हुई। 

महिला के खाते से ठगों ने ₹40,900 निकाल लिए थे,

 जिसकी शिकायत NCRP पोर्टल पर की गई थी।


थाना प्रभारी हरपालपुर और उनकी टीम के अथक प्रयासों से महिला के ₹30,000 वापस मिल गए हैं। पुलिस ने शेष राशि भी जल्द दिलाने का भरोसा दिया है।

 अपनी मेहनत की कमाई वापस पाकर खुशी में शिकायतकर्ता ने थाने पहुंचकर थाना प्रभारी और समस्त स्टाफ को मिठाई खिलाकर धन्यवाद दिया

बुंदेली न्यूज

अमित भटनागर: व्यक्तित्व और पृष्ठभूमि

​अमित भटनागर मूल रूप से मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के रहने वाले हैं। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद, उन्होंने बुंदेलखंड के पिछड़ेपन और किसानों की दयनीय स्थिति को अपना मुख्य कार्यक्षेत्र बनाया।

1. आरटीआई और सक्रियता की शुरुआत

​भटनागर ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत सूचना के अधिकार (RTI) के प्रभावी उपयोग से की। उन्होंने सरकारी योजनाओं में होने वाले भ्रष्टाचार को उजागर किया और प्रशासन को जवाबदेह बनाया। उनकी पहचान एक ऐसे कार्यकर्ता के रूप में बनी जो फाइलों के अंदर दबे सच को बाहर लाने का माद्दा रखते हैं।

2. जल और पर्यावरण संरक्षण

​बुंदेलखंड की सबसे बड़ी समस्या पानी है। भटनागर ने पुराने तालाबों के पुनरुद्धार और जल संचयन के लिए कई जागरूकता अभियान चलाए। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि बुंदेलखंड का विकास "बाहरी योजनाओं" से ज्यादा "स्थानीय संसाधनों" के संरक्षण से होगा।

केन-बेतवा लिंक परियोजना: संघर्ष का मुख्य केंद्र

​भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना, केन-बेतवा लिंक, अमित भटनागर के संघर्ष का सबसे बड़ा मोर्चा बनी है।

  • विस्थापन की पीड़ा: इस परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा और दर्जनों गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। भटनागर का मानना है कि विकास के नाम पर आदिवासियों और किसानों को उनकी जड़ों से उखाड़ना अन्याय है।
  • पुनर्वास पैकेज की लड़ाई: वे सरकार द्वारा दिए जा रहे मुआवजे और पुनर्वास नीति को "अपर्याप्त" मानते हैं। उनकी मांग है कि विस्थापित परिवारों को केवल नकद राशि न दी जाए, बल्कि उनके जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए खेती योग्य जमीन और रोजगार की गारंटी दी जाए।
  • आंदोलन का नेतृत्व: पिछले कई महीनों से वे प्रभावित गांवों में चौपालें लगा रहे हैं और लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

जेल यात्रा और जमानत का घटनाक्रम

​अमित भटनागर की हालिया गिरफ्तारी को उनके समर्थकों ने "आवाज दबाने की कोशिश" करार दिया था।

घटनाक्रम का संक्षिप्त विवरण:

  1. गिरफ्तारी: आंदोलन के दौरान जब विस्थापितों की मांगें उग्र होने लगीं, तो प्रशासन ने धारा 151 और अन्य प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
  2. जेल शिफ्टिंग की राजनीति: उन्हें पहले बिजावर जेल में रखा गया था, लेकिन सुरक्षा कारणों या रणनीतिक कारणों का हवाला देते हुए बुधवार को अचानक उन्हें लवकुश नगर जेल शिफ्ट कर दिया गया।
  3. जमानत और रिहाई: उनके समर्थकों और स्थानीय वकीलों की कड़ी मशक्कत के बाद, न्यायालय ने उनकी जमानत मंजूर की। जेल से बाहर आते ही उनके समर्थकों ने 'किसान एकता' के नारे लगाए।

भटनागर के नेतृत्व की विशेषताएं

  • अहिंसक विरोध: वे गांधीवादी विचारधारा के समर्थक हैं और हमेशा शांतिपूर्ण धरने और संवाद में विश्वास रखते हैं।
  • कानूनी समझ: वे केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि कानूनी दस्तावेजों और अदालतों में भी मजबूती से पक्ष रखते हैं।
  • जमीनी जुड़ाव: वे महलों या दफ्तरों के नेता नहीं हैं; वे प्रभावित क्षेत्रों के खेतों और झोपड़ियों में रहकर लड़ाई लड़ते हैं।

भविष्य की रणनीति और चुनौतियां

​रिहाई के बाद अमित भटनागर के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। सरकार परियोजना पर तेजी से काम करना चाहती है, जबकि विस्थापितों का असंतोष बढ़ रहा है।

"जेल की सलाखें मेरे इरादों को नहीं बदल सकतीं। केन-बेतवा के प्रभावितों को उनका हक दिलाना ही मेरा प्राथमिक लक्ष्य है।" - रिहाई के बाद अमित भटनागर का कथित बयान।


​भटनागर अब इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने और मानवाधिकार संगठनों को इस संघर्ष से जोड़ने की योजना बना रहे हैं।

महाराजपुर विधायक ने ग्राम वासियों को सीसी रोड की दी सौगात
/महाराजपुर विधानसभा की लोकप्रिय विधायक श्री कामाख्या प्रताप सिंह के द्वारा ग्राम पंचायत मुखर्रा के ग्राम वासियों को सीसी रोड की दी गई सौगात। एवं ग्राम वॉशिंग में फूल माला से किया स्वागत। जानकारी के  मुताबिक छतरपुर जिले की महाराजपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मुखर्रा में महाराजपुर विधायक श्री कामाख्या प्रताप सिंह जी द्वारा ग्राम वासियों को सीसी रोड की स्वागत दी गई जिसमें सर्वप्रथम गणेश वंदना कर पूजन किया और फिर ग्राम वासियों ने विधायक श्री सिंह जी का आभार व्यक्त किया। जिसमें सीसी रोड की लंबाई 370 एवं चौड़ाई तीन मी 75 सेमी बताई गई है। जिसकी लागत सीसी रोड की लगभग 16 लाख बताई गई है। इस मौके पर उपस्थित कार्यक्रम में एवं शिलान्यास भूमि पूजन में। महाराजपुर विधायक श्री कामाख्या प्रताप सिंह राजा साहब जी एवं ग्राम पंचायत मुखर्रा प्रधान श्री अरविंद सिंह यादव, पीएमसीएसवाई के गम खान जी, एसडीओ वी  एल प्रजापति, उप यंत्री उषा सिंह ठेकेदार सचिन सिंह, हरगोविंद नायक जी, श्याम सुंदर अर्जरिया जी, राकेश सोनी जी, दयाशंकर यादव जी, एवं महाराजपुर पल मंडल अध्यक्ष भाजपा दयाराम चौरसिया जी, महाराजपुर मंडल अध्यक्ष राहुल पुरोहित जी, गढ़ी मलहरा मंडल अध्यक्ष आनंद मीनू चौरसिया जी, कुर्राह सरपंच नाजिर बेग जी, अरविंद सिंह राजावत जी, मुकेश अहिरवार जी, श्याम जी चौरसिया जी विनय चौरसिया जी, दीपेंद्र पटेल जी, मानसिंह राय रिंकू राजा जी, पत्रकार मोहम्मद तौफीक खान। एवं समस्त भाजपा कार्यकर्ता एवं समस्त ग्रामवासी ग्राम पंचायत मुखर्रा /पत्रकार मोहम्मद तौफीक खान गढ़ी मलहरा।
हरपालपुर: वार्ड नंबर 13 में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई संत रविदास जयंती, वक्ताओं ने बताया महान समाज सुधारक
​हरपालपुर। नगर के वार्ड नंबर 13 में रविवार को महान समाज सुधारक एवं संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती बड़ी धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने संत रविदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
​वरिष्ठ समाजसेवियों ने दी श्रद्धांजलि
​कार्यक्रम में मुख्य रूप से वरिष्ठ समाजसेवी मुन्नू दद्दा और भाजपा मंडल अध्यक्ष अजीत सिंह परमार उपस्थित रहे। वक्ताओं ने संत रविदास जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच और भेदभाव को मिटाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका संदेश 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' आज भी प्रासंगिक है।
​कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
​कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, राजनीति और समाजसेवा से जुड़े कई गणमान्य नागरिक शामिल हुए, जिनमें प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:
​मातादीन अहिरवार (पूर्व पार्षद)
​मुन्नी लाल (अध्यापक)
​रामकिशोर (अध्यापक)
​लेखराज (अध्यापक)
​हरिश्चन्द्र (अध्यापक)
​डॉ. अश्वानी अहिरवार
​भैयालाल अहिरवार
​कमलेश अहिरवार
​शिवम अहिरवार
​सामाजिक एकता पर बल
​कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व पार्षद मातादीन अहिरवार और शिक्षक समुदाय ने बच्चों और युवाओं को संत रविदास जी की शिक्षाओं से प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे समाज की मुख्यधारा से जुड़ा जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित समस्त लोगों ने सामाजिक समरसता की शपथ ली।
​इस अवसर पर वार्ड के अन्य गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।