फल ही नहीं, 'महा-औषधि' भी है अमरूद; सेहत के राज और तंत्र-मंत्र में इसका रहस्यमय उपयोग
प्रकृति ने हमें कई ऐसे अनमोल उपहार दिए हैं, जो हमारे घर के आंगन में तो होते हैं, लेकिन हम उनकी असली ताकत से अनजान रहते हैं। ऐसा ही एक फल है अमरूद (Psidium guajava)। सर्दियों की गुनगुनी धूप में काले नमक के साथ अमरूद का स्वाद किसे नहीं भाता? लेकिन आज की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको अमरूद के उन पहलुओं से रूबरू कराएंगे, जो शायद आपने पहले कभी नहीं सुने होंगे।
1. सेहत का 'पावरहाउस': क्यों है यह सेब से भी बेहतर?
आयुर्वेद में अमरूद को 'अमृत फल' की संज्ञा दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें सेब की तुलना में कहीं अधिक पोषक तत्व होते हैं।
विटामिन-सी का भंडार: एक अमरूद में संतरे से 4 गुना ज्यादा विटामिन-सी होता है, जो आपकी त्वचा में निखार लाता है और बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है।
पेट के रोगों का काल: अमरूद के बीज और फाइबर 'नेचुरल लैक्सेटिव' का काम करते हैं। पुरानी से पुरानी कब्ज (Constipation) के लिए खाली पेट अमरूद खाना रामबाण इलाज है।
वजन घटाने में सहायक: इसमें कैलोरी कम और फाइबर ज्यादा होता है, जिससे पेट जल्दी भर जाता है और आप अतिरिक्त खाने से बचते हैं।
कोलेस्ट्रॉल पर वार: यह शरीर में 'गुड कोलेस्ट्रॉल' को बढ़ाता है और नसों को साफ रखने में मदद करता है।
2. पत्तों में छिपा है 'चमत्कारी इलाज'
केवल फल ही नहीं, अमरूद के पत्ते भी किसी औषधि से कम नहीं हैं:
दांत का दर्द: पत्तों को उबालकर कुल्ला करने से दांत के दर्द और मसूड़ों की सूजन में तुरंत आराम मिलता है।
डायबिटीज: अमरूद के पत्तों की चाय ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
बालों का झड़ना: पत्तों के रस को स्कैल्प पर लगाने से बाल मजबूत होते हैं।
3. तंत्र शास्त्र और लोक मान्यताओं में अमरूद का रहस्य
भारतीय ग्रामीण अंचलों और प्राचीन तंत्र विद्याओं में अमरूद के पेड़ और फल का एक अलग ही महत्व बताया गया है। हालांकि विज्ञान इन्हें 'विश्वास' की श्रेणी में रखता है, लेकिन जनश्रुतियों में इनका गहरा असर माना जाता है:
नकारात्मक ऊर्जा का नाश: तंत्र शास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति पर 'ऊपरी हवा' या नकारात्मक ऊर्जा का साया हो, तो शनिवार के दिन एक पका हुआ अमरूद सिर से सात बार वारकर किसी चौराहे पर रख देने से बाधाएं दूर होती हैं।
सुख-समृद्धि की जड़: ऐसी मान्यता है कि अमरूद की जड़ को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से धन की आवक बढ़ती है और दरिद्रता का नाश होता है।
नजर दोष: छोटे बच्चों को नजर लगने पर अमरूद के पत्तों को सात बार घुमाकर आग में जलाने की परंपरा कई राज्यों में आज भी प्रचलित है।
वास्तु शास्त्र: वास्तु के अनुसार, घर की उत्तर-दिशा में अमरूद का पेड़ लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और शांति को बढ़ावा देता है।
4. सावधानी: कब हो सकता है नुकसान?
अमरूद के फायदों के बीच कुछ चेतावनियां भी जरूरी हैं:
रात में सेवन: इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए सूर्यास्त के बाद इसे खाने से खांसी या कफ की समस्या हो सकती है।
पथरी के रोगी: अमरूद के बीजों में मौजूद कैल्शियम और ऑक्सलेट 'किडनी स्टोन' की समस्या को बढ़ा सकते हैं। ऐसे रोगियों को बीज निकालकर ही सेवन करना चाहिए।
गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को अधिक मात्रा में अमरूद खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पेट में मरोड़ या दस्त की शिकायत हो सकती है।

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