अजब नेताजी की गजब कहानी: बिना इलेक्शन 'कलेक्शन', बिना पद 'चौधराहट'!
सियासी गिरगिट भी शरमा जाए: बीजेपी का 'कमल', सपा का 'रंग' और महाराज का 'ढंग'!
कहते हैं कि राजनीति में विचारधारा अटल होती है, लेकिन हमारे हरसू महाराज जी ने तो "मल्टी-टैलेंटेड" होने की सारी हदें पार कर दी हैं। इनका ताजा पोस्टर देखकर गिरगिट भी सोच में पड़ गया होगा कि भाई, इतना तेज़ रंग तो मैं भी नहीं बदल सकता!
कलर कॉम्बिनेशन या 'खिचड़ी' पॉलिटिक्स?
महाराज जी का यह पोस्टर किसी 'पॉलिटिकल फ्यूजन' से कम नहीं है। एक तरफ कोने में बीजेपी (BJP) का कमल का फूल मुस्कुरा रहा है, तो दूसरी तरफ पूरे पोस्टर का बैकग्राउंड समाजवादी पार्टी (SP) के 'हरे और लाल' रंग में रंगा हुआ है।
ऊपर भगवा गायब, नीचे लाल-हरा छाया! देखने वाले हैरान हैं कि महाराज सुबह भाजपा की 'चाय' पीते हैं या शाम को सपा की 'साइकिल' पर सैर करते हैं? लगता है महाराज ने सोचा कि "जो पार्टी सत्ता में आए, उसका रंग पहले से ही लगाकर रखो, रिस्क क्यों लेना!"
नगर पालिका में 'पंचायत' का तड़का!
नौगांव की जनता बेचारी भोली है, उसे लगता था कि वे शहर (नगर पालिका) में रहते हैं। लेकिन महाराज जी ने पोस्टर पर खुद को "किसान मोर्चा सरपंच" और "नौगांव सरपंच" घोषित करके जनता को सीधे गांव वापस भेज दिया।
कटाक्ष: लगता है महाराज जी को शहर की हवा रास नहीं आ रही, इसलिए उन्होंने अकेले ही पूरे नौगांव को 'ग्राम पंचायत' घोषित कर दिया है। अब बस इनका खुद को 'नौगांव का प्रधानमंत्री' घोषित करना बाकी रह गया है!
'पद' नहीं तो क्या, 'एडिटिंग' तो अपने हाथ में है!
भाजपा में फिलहाल इनके पास कोई आधिकारिक पद नहीं है, लेकिन पोस्टर देखकर लगता है जैसे पूरी पार्टी इन्हीं के कंधों पर टिकी है। खुद को 'फर्जी' महामंत्री और सरपंच बताना तो ऐसे है जैसे कोई किराए के मकान में रहकर खुद को 'जमींदार' घोषित कर दे।
जनता के चुटीले सवाल:
महाराज, ये दिल है कि फुटबॉल? बीजेपी का सिंबल और सपा का कलर—इतना "कन्फ्यूजन" तो खुद अखिलेश और मोदी जी को भी नहीं होगा!
क्या ये नया गठबंधन है? जनता पूछ रही है कि क्या आपने अंदर ही अंदर 'भाजपा-सपा' का विलय करा दिया है?
पचता नहीं तो खाना मत: पोस्टर पर लिखा है "जो पचता नहीं, वो खाना मत।" महाराज, जनता को आपकी ये 'पद' वाली भूख और 'रंग' बदलने की कला बिल्कुल नहीं पच रही है!
निष्कर्ष:
महाराज जी, राजनीति में 'सिद्धांत' और 'रंग' दोनों मायने रखते हैं। कमल के साथ लाल-हरा बैकग्राउंड लगाना वैसा ही है जैसे सूट के नीचे धोती पहन लेना। पद मांगकर लिए जाते हैं या जीत कर, ऐसे फोटोशॉप से 'सरपंच' बनकर आप सिर्फ लोगों का मनोरंजन ही कर सकते हैं, वोट नहीं पा सकते!
बधाई हो नौगांव वालों! आपके पास एक ऐसा नेता है जो सुबह बीजेपी का होता है, दोपहर में सपा के रंग में रंगता है और रात को सोते समय खुद को 'सरपंच' मान लेता है।
नोट वायरल खबर मामला गंभीर जांच का विषय खबर पोस्टर के आधार पर लिखी गई
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