All Right Reserved Copyright ©

Ads

3/random/post-list

Random Posts

Poll answer ME

Audio Player

पिछले माह पेज देखे जाने की संख्या

यह ब्लॉग खोजें

3/related/default
जिले की व आसपास क्षेत्र की खबरों व विज्ञापनों के लिए संपर्क करे हमारे रजिस्टर्ड न्यूज पोर्टल बुंदेली न्यूज़ पोर्टल से जुड़ने व अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे। बुंदेली न्यूज टीम (रजिस्टर्ड न्यूज पोर्टल)* में आवश्यकता है अनुभवी योग्य न्यूज रिपोटर्स की योग्यता अनुसार पारिश्रमिक दिया जाएगा इक्षुक व्यक्ति पुरूष/ महिला तुरन्त सम्पर्क करें www.bundelenews.in एडीटर चीफ/ चैनल हैड कुलदीप वर्मा:-9171982882

बुन्देली न्यूज़

HARPALPUR, MADHYA PRADESH, India

channel head

channel head

BN Add

BN Add

Audio Player

Translate

Lorem Ipsum is simply dummy text of the printing and typesetting industry. Lorem Ipsum has been the industry's.

AMP

Lorem 1

Technology

Circle Gallery

Shooting

Racing

News

Lorem 4

जेफ्री एपस्टीन कौन था?

1. जेफ्री एपस्टीन केस का संक्षिप्त परिचय
कौन था एपस्टीन: एक अमेरिकी अरबपति और हाई-प्रोफाइल फाइनेंसर।

मुख्य आरोप: नाबालिगों की तस्करी (Sex Trafficking) और एक अंतरराष्ट्रीय यौन शोषण नेटवर्क चलाना।
फाइलों का स्रोत: ये दस्तावेज वर्जीनिया गिफ्रे द्वारा घिसलेन मैक्सवेल के खिलाफ किए गए 2015 के मानहानि मुकदमे से निकले हैं।

​'एपस्टीन फाइल्स' क्या हैं?

​ये फाइलें असल में वर्जीनिया गिफ्रे (Virginia Giuffre) द्वारा एपस्टीन की सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल (Ghislaine Maxwell) के खिलाफ 2015 में दायर किए गए एक नागरिक मानहानि के मुकदमे के अदालती दस्तावेज हैं।

  • नामों का खुलासा: जनवरी 2024 में न्यूयॉर्क की एक अदालत के आदेश के बाद इन दस्तावेजों को सार्वजनिक किया गया।
  • दस्तावेजों की संख्या: इसमें हजारों पन्ने शामिल हैं जिनमें ईमेल, गवाहों के बयान और कानूनी दलीलें हैं।
  • महत्व: इन फाइलों में लगभग 150-200 लोगों के नामों का जिक्र है, जो किसी न किसी रूप में एपस्टीन के संपर्क में थे।

​फाइलों में किन बड़े नामों का जिक्र है?

​यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फाइलों में नाम होने का मतलब यह नहीं है कि वे सभी किसी अपराध में शामिल थे। कुछ लोग केवल एपस्टीन के परिचित थे, कुछ उसके विमान में सवार हुए थे, तो कुछ का नाम गवाहों के बयानों में आया। प्रमुख नामों में शामिल हैं:

  • प्रिंस एंड्रयू: ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य, जिन पर गंभीर आरोप लगे।
  • बिल क्लिंटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति (फाइलों के अनुसार एपस्टीन ने कहा था कि क्लिंटन को 'जवान लड़कियां' पसंद हैं, हालांकि क्लिंटन ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है)।
  • डोनाल्ड ट्रंप: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति (उनका नाम दस्तावेजों में है, लेकिन उन पर किसी गलत काम का आरोप इन फाइलों में नहीं लगा है)।
  • स्टीफन हॉकिंग: प्रसिद्ध वैज्ञानिक (एक ईमेल में उनका जिक्र एपस्टीन के द्वीप पर एक कॉन्फ्रेंस के संदर्भ में था)।

​वीडियो और फोटो की जानकारी

​चूँकि यह मामला अत्यंत संवेदनशील और कानूनी गोपनीयता (Privacy) से जुड़ा है, इसलिए अदालती दस्तावेजों के साथ कोई भी आपत्तिजनक वीडियो या फोटो सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किए गए हैं।

  • उपलब्ध सामग्री: इंटरनेट पर आपको एपस्टीन के निजी द्वीप (Little St. James), उसके निजी विमान (Lolita Express) और विभिन्न हाई-प्रोफाइल पार्टियों में मशहूर हस्तियों के साथ उसकी पुरानी तस्वीरें मिल जाएंगी।
  • सावधानी: सोशल मीडिया पर कई "डीपफेक" या एडिट की गई तस्वीरें भी वायरल होती हैं, इसलिए किसी भी फोटो पर विश्वास करने से पहले उसकी पुष्टि करना आवश्यक है।

​इस मामले का वर्तमान स्टेटस

  • घिसलेन मैक्सवेल: एपस्टीन की मुख्य सहयोगी वर्तमान में मानव तस्करी के जुर्म में 20 साल की जेल की सजा काट रही है।
  • जांच जारी: हालांकि एपस्टीन मर चुका है, लेकिन अधिकारी अभी भी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रहे हैं।
  • राजनीति और शाही परिवार
  • प्रिंस एंड्रयू (Prince Andrew): ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य। फाइलों में उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं, हालांकि उन्होंने इनसे इनकार किया है।
  • बिल क्लिंटन (Bill Clinton): अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति। उनका नाम फाइलों में कई बार आया है और वे एपस्टीन के निजी विमान में कई बार यात्रा कर चुके हैं।
  • डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump): अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति। दस्तावेजों के अनुसार वे एपस्टीन को जानते थे, लेकिन उन पर किसी गलत काम का आरोप इन विशिष्ट फाइलों में नहीं लगा है।
  • एहुद बराक (Ehud Barak): इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री।
  • हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri): भारतीय मंत्री और पूर्व राजनयिक। दस्तावेजों में उनके और एपस्टीन के बीच पुराने ईमेल एक्सचेंजों का जिक्र है (उस समय वे मंत्री नहीं थे)।
  • व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin): रूस के राष्ट्रपति। फाइलों के अनुसार एपस्टीन उन तक पहुँच बनाने की कोशिश कर रहा था।
  • व्यापार और तकनीक (Business & Tech)
  • बिल गेट्स (Bill Gates): माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक। फाइलों में एपस्टीन के साथ उनकी मुलाकातों और ईमेल का जिक्र है।
  • एलन मस्क (Elon Musk): टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक। उनका नाम भी कुछ दस्तावेजों और फ्लाइट लॉग्स में आया है।
  • सर्गेई ब्रिन (Sergey Brin): गूगल के सह-संस्थापक।
  • अनिल अंबानी (Anil Ambani): भारतीय उद्योगपति। फाइलों के अनुसार एपस्टीन ने उनसे व्यावसायिक सौदों के लिए संपर्क किया था।
  • ग्लैन डबिन (Glenn Dubin): एक अरबपति हेज फंड मैनेजर।
  • विज्ञान और मनोरंजन
  • स्टीफन हॉकिंग (Stephen Hawking): विश्व प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी। उनका नाम एक ईमेल में एपस्टीन के द्वीप पर आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के संबंध में आया था।
  • माइकल जैक्सन (Michael Jackson): मशहूर पॉप स्टार। गवाहों के अनुसार उन्हें एपस्टीन के घर पर देखा गया था।
  • डेविड कॉपरफील्ड (David Copperfield): प्रसिद्ध जादूगर (Magician)।
  • लियोनार्डो डिकैप्रियो, केविन स्पेसी, और कैमरून डियाज़: इन हॉलीवुड सितारों के नाम भी गवाहों के बयानों में आए हैं, हालांकि इनमें से अधिकतर ने एपस्टीन के साथ किसी भी गहरे संबंध से इनकार किया है।
  • महत्वपूर्ण नोट:
  • दोषी नहीं: इन फाइलों में नाम होने का मतलब यह नहीं है कि ये सभी लोग किसी अपराध में शामिल थे। इनमें से कई लोग केवल एपस्टीन के सामाजिक दायरे का हिस्सा थे या गवाहों द्वारा उनका उल्लेख किया गया था।
  • घिसलेन मैक्सवेल (Ghislaine Maxwell): यह नाम सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि वह एपस्टीन की मुख्य सहयोगी थी और उसे इस पूरे नेटवर्क को चलाने के लिए 20 साल की सजा सुनाई गई है।

वायरल खबर 
नौगांव थाना क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में शराब कारोबारियों द्वारा खुलेआम बिक रही अवैध शराब,
ग्रामीण इलाकों में शराब बेचने वाले खुलेआम बेचते हैं शराब कहते हैं ठेकेदार की है शराब


नौगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई गांवों में इन दिनों अवैध शराब का धंधा जोरों पर है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम शराब बेची जा रही है, जिससे सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो रहा है और युवाओं में नशे की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।

विशेष रूप से  सुनाटी,सुकवा, अच्चट। कीरतपुरा, चंदपुरा, पुरवा गांव सहित कई गांवों में अवैध शराब के कारोबार ने जड़ें जमा ली हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि या तो पुलिस को सब पता है और वह अनदेखी कर रही है, या फिर प्रशासन अभी भी कुंभकर्णी नींद में सो रहा है।

गांवों के स्थानीय निवासियों ने बताया कि “गांवों में शाम होते ही शराब की अवैध दुकानें खुल जाती हैं। युवाओं के साथ-साथ किशोर भी इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। इससे न केवल अपराध बढ़ रहा है बल्कि घरेलू हिंसा और पारिवारिक झगड़ों में भी इजाफा हुआ है।”

अवैध शराब बिक्री से न केवल कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है। कई बार जहरीली शराब पीने से लोगों की तबीयत बिगड़ने की खबरें भी सामने आई हैं।

प्रशासन और पुलिस की चुप्पी सवालों के घेरे में
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से यह सारा कारोबार फल-फूल रहा है। अगर समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
 चोरी हुई गाड़ी का 'मास्टरमाइंड' गिरफ्तार: लग्जरी गाड़ियों के बड़े रैकेट का खुलासा!

छतरपुर, मध्य प्रदेश: अरे भैया! छतरपुर के पूर्व बीजेपी जिला अध्यक्ष गुड्डू सिंह की फॉर्च्यूनर चोरी का मामला अब गरमा गया है! पुलिस ने इस चोरी के पीछे के असली 'मास्टरमाइंड' को दबोच लिया है – ये जनाब हैं देरी रोड के रहने वाले अनूप सिंह परमार। पता चला है कि गुड्डू सिंह ने इसी अनूप से वो 'चोरी वाली' फॉर्च्यूनर खरीदी थी!
महाराष्ट्र से जुड़े तार, RTO में भी थी धांधली!
जो फॉर्च्यूनर चोरी हुई, वो महाराष्ट्र नंबर की थी और मालिक का नाम संतोष शिंदे बताया जा रहा है। पुलिस इस मामले की तह तक जाने में लगी है। अनूप सिंह परमार की गिरफ्तारी के बाद उसकी फोटो भी सामने आई है।
सूत्रों की मानें तो अनूप सिंह कोई छोटा-मोटा चोर नहीं, बल्कि महाराष्ट्र से महंगी-महंगी चोरी की गाड़ियां लाकर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे कई राज्यों के नेताओं और बड़े-बड़े व्यापारियों को बेचता था। और तो और, उसकी RTO में भी तगड़ी सेटिंग थी, जिसके दम पर चोरी की गाड़ियां भी 'पक्की' हो जाती थीं!
फर्जी नंबर प्लेट, कई राज्यों में फैला नेटवर्क!
पुलिस को उम्मीद है कि अनूप सिंह से पूछताछ के बाद लग्जरी गाड़ियों की चोरी के कई गहरे राज खुलेंगे। अंदाजा है कि प्रदेश में ऐसी कई गाड़ियां फर्जी नंबर प्लेट लगाकर धड़ल्ले से चल रही हैं। इस गिरोह के तार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से जुड़े हो सकते हैं। अनूप सिंह की गिरफ्तारी से लग्जरी वाहन चोरी के एक बहुत बड़े अंतर्राष्ट्रीय रैकेट का पर्दाफाश होने की संभावना है। देखते जाइए, अभी तो ये शुरुआत है, पिक्चर अभी बाकी है! मामला गंभीर है जांच का विषय है

"बागेश्वर धाम" में आयोजित कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए छतरपुर पुलिस द्वारा जारी की गई प्रतिबंधित सामग्री की लिस्ट
दिनांक 21 फरवरी से 27 फरवरी तक बागेश्वर धाम में कथा, वैवाहिक कार्यक्रम सहित अन्य कार्यक्रम आयोजित है, कार्यक्रम में अत्यधिक श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने के साथ-साथ देश विदेश से महत्वपूर्ण सम्माननीय व्यक्तियों का आगमन है। सभास्थल, मार्ग एवं क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था की दृष्टि से छतरपुर पुलिस द्वारा व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था एवं जनसामान्य की सुविधा हेतु छतरपुर पुलिस द्वारा कई घेरे की सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई है। सुरक्षा की वजह से कई वस्तुएं लाने या उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी जैसे-

* ड्रोन/ड्रोन कैमरा पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
* कोई भी फेंकी जा सकने वाली वस्तु, जैसे- सिक्के, पेन आदि।
* कोई भी धारदार वस्तु, जैसे- चाकू, छुरी, ब्लेड आदि।
* पानी की बोतलें या पाऊच।
* किसी भी प्रकार के ज्वलनशील पदार्थ, जैसे - लाईटर, माचिस, पटाखे आदि।
* लाठी, डंडा, छाता तथा अन्य किसी भी प्रकार के औजार एवं हथियार।
* बीड़ी, सिगरेट, गुटखा एवं अन्य नशीले पदार्थ।
* मोबाईल फोन को छोड़कर अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।
* किसी भी तरह की आपत्तिजनक सामग्री
* बड़ा बैग, झोला या कोई ढका हुआ सामान एवं कीमती सामग्री ना लाएं।

Home Department of Madhya Pradesh 
Madhya Pradesh Police #mppolice 
Jansampark Madhya Pradesh 
DIG Chhatarpur Range 
PRO Jansampark Chattarpur 
#chhatarpur
HMPV वायरस: एक विस्तृत नज़र
HMPV (Human Metapneumovirus) एक आम सांस संबंधी वायरस है जो सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण पैदा करता है। यह खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है।
HMPV वायरस के लक्षण
 * खांसी (अक्सर बलगम के साथ)
 * बुखार
 * नाक बंद होना
 * सांस लेने में तकलीफ
 * गले में खराश
HMPV कैसे फैलता है?
HMPV एक संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलता है। यह वायरस हवा में मौजूद छोटी बूंदों के माध्यम से या संक्रमित सतहों को छूने के बाद मुंह या नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।
HMPV से बचाव के उपाय
 * हाथों को बार-बार धोएं: साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक अपने हाथों को धोएं।
 * चेहरे को न छुएं: अपनी आंखों, नाक और मुंह को छूने से बचें।
 * दूरी बनाएं: बीमार लोगों से दूरी बनाए रखें।
 * मास्क पहनें: भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें।
 * सफाई और स्वच्छता का ध्यान रखें: अपने आस-पास की सतहों को नियमित रूप से साफ करें।
HMPV का इलाज
HMPV के लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है। आमतौर पर लक्षणों को कम करने के लिए ओवर-द-काउंटर दवाएं दी जाती हैं। गंभीर मामलों में, अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता हो सकती है।
HMPV और COVID-19 में समानताएं
HMPV और COVID-19 दोनों ही सांस संबंधी बीमारियां हैं और इनके लक्षण भी काफी हद तक समान हैं। हालांकि, COVID-19 एक अधिक गंभीर बीमारी है और इससे होने वाली मौतों की संख्या भी अधिक है।
निष्कर्ष
HMPV एक आम वायरस है, लेकिन इससे बचाव के लिए कुछ सावधानियां बरतकर आप खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं। अगर आपको HMPV के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।
नोट: यह जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है और इसे किसी चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं लेना चाहिए।
क्या आप HMPV वायरस के बारे में और कुछ जानना चाहते हैं?

अमित भटनागर का प्रधानमंत्री को पत्र - केन-बेतवा लिंक को भयानक विनाश बताते हुए बुंदेलखंड के जल संकट के लिए स्थायी विकल्प सुझाया

जल संकट का समाधान हमारे इतिहास में छिपा है; हमें केवल उसकी ओर देखने की आवश्यकता है : अमित भटनागर,

(बिजावर, छतरपुर// 22 दिसंबर, सामाजिक कार्यकर्ता व आप नेता अमित भटनागर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना पर गंभीर सवाल उठाते हुए भयंकर विनाशकारी बताया है, अमित भटनागर ने कहा कि ये बात वह नहीं कह रहे वल्कि सुप्रीम कोर्ट की विषय विशेषज्ञों की केन्द्रीय सशक्त समिति ने सरकार को इस परियोजना पर फटकार लगते हुए यह बात कही है। रिपोर्ट के अनुसार, यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप नहीं है।
अमित भटनागर ने इस पत्र के माध्यम से परियोजना के पर्यावरणीय, सामाजिक और कानूनी उल्लंघनों पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह परियोजना बुंदेलखंड के जल संकट के समाधान के नाम पर एक भ्रामक प्रयास है, जो न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि आदिवासी अधिकारों और भूमि अधिग्रहण कानूनों का भी उल्लंघन कर रही है।
परियोजना संबंधी मुख्य बिंदु पर प्रकाश डालते हुए अमित भटनागर का कहना है कि:
1. जल संकट का समाधान या भ्रामक परियोजना?
अमित भटनागर ने आरोप लगाया है कि केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना बुंदेलखंड की समस्याओं का हल नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड के बाहर के क्षेत्रों को पानी उपलब्ध कराना है, जबकि क्षेत्र की वास्तविक जल संकट की समस्या जस की तस बनी रहेगी।
2. पर्यावरणीय और सामाजिक उल्लंघन:
अमित भटनागर ने पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) की खामियों की ओर इशारा किया, जिसमें जैव विविधता, भूवैज्ञानिक विशेषताएं और दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभावों का सही आकलन नहीं किया गया है। साथ ही, परियोजना में 46 लाख पेड़ों की कटाई और संकटग्रस्त प्रजातियों के आवास का विनाश होगा।
3. आदिवासी अधिकारों का उल्लंघन:
भटनागर ने परियोजना के तहत आदिवासी समुदायों की अनदेखी और ग्राम सभाओं के आयोजन में पारदर्शिता की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि परियोजना प्रभावित 22 गांवों के ग्रामीणों की आवाज़ को अनसुना किया गया है।
आवश्यक सुधार और सुझाव:
अमित भटनागर ने परियोजना पर तत्काल रोक लगाने, जल विज्ञान के आंकड़ों की समीक्षा, ग्राम सभाओं का पारदर्शी आयोजन, और पर्यावरणीय प्रभावों का पुनर्मूल्यांकन करने की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने बुंदेलखंड के प्राचीन जल स्रोतों जैसे चन्देलकालीन तालाबों और नालों को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार से सुझाव दिया है, जो एक स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल समाधान हो सकता है।
स्थानीय जल संकट का स्थायी समाधान:
अमित भटनागर का मानना है कि जल संकट का समाधान हमारे इतिहास में छिपा है; हमें केवल उसकी ओर देखने की आवश्यकता है, बुंदेलखंड के जल संकट का स्थायी समाधान पारंपरिक जल स्रोतों और जल संचयन पद्धतियों के पुनर्निर्माण में निहित है। उन्होंने इस संदर्भ में चन्देलकालीन तालाबों और बावड़ियों को पुनर्जीवित करने का सुझाव दिया, ताकि जल संकट का समाधान स्थानीय स्तर पर किया जा सके।
20गौबंश के कंकाल मिलने से क्षेत्र में तमाम हिन्दू संघठनों में मची अफरा तफरी।

गौ सेवकों ने तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन।
बड़ामलहरा विधानसभा की ग्राम पंचायत भोयरा के चौधरीखेरा गांव में गायों के कंकाल मिलने की घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया। चौधरीखेरा में लगभग 20 गायों के कंकाल पाए गए। इस घटना से गौसेवा संगठनों में आक्रोश फैल गया। ग्राम चौधरीखेरा में बने ग्राम पंचायत के मंगल भवन में बड़ी संख्या में गायों के अवशेष मिलने के बाद, गौसेवों ने आज दोपहर में इस पूरी घटना को लेकर तहसीलदार घुवारा एवं उपथाना प्रभारी को एक ज्ञापन सौंपा है।

गौसेवकों ने प्रशासन से मांग की है कि लोंगों ने इस कृत्य को अंजाम दिया है उन पर सख्त से सख्त कार्यवाई होना चाहिए और भविष्य में गौ माताओं पर इस तरह का अत्याचार नही होना चाहिए।
छतरपुर जिले में क्या यह जेहाद है या आतंकवाद 
- छतरपुर जिले में धमोरा के शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल को मारी गोली

छतरपुर।प्रिंसिपल की सर में गोली मारकर छात्र ने की हत्या, धमोरा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की घटना, बाथरूम में जाकर सिर में मार दी गोली, घटनास्थल पर प्रिंसिपल  की मौत ओरछा रोड थाना क्षेत्र के धमोरा की घटना।पुलिस पहुंची मौके पर....
(अखिलेश पटेरिया, राघव भास्कर)