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बुन्देली न्यूज़

HARPALPUR, MADHYA PRADESH, India

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हरपालपुर पुलिस की बड़ी कामयाबी: साइबर ठगी के ₹30,000 वापस कराए,
पीड़ित ने थाने में बांटी मिठाई

हरपालपुर: साइबर ठगी का शिकार हुई एक महिला के लिए हरपालपुर पुलिस मददगार साबित हुई। महिला के खाते से ठगों ने ₹40,900 निकाल लिए थे, जिसकी शिकायत NCRP पोर्टल पर की गई थी। थाना प्रभारी हरपालपुर और उनकी टीम के अथक प्रयासों से महिला के ₹30,000 वापस मिल गए हैं। पुलिस ने शेष राशि भी जल्द दिलाने का भरोसा दिया है। अपनी मेहनत की कमाई वापस पाकर खुशी में शिकायतकर्ता ने थाने पहुंचकर थाना प्रभारी और समस्त स्टाफ को मिठाई खिलाकर धन्यवाद दिया
हरपालपुर पुलिस की बड़ी कामयाबी: साइबर ठगी के ₹30,000 वापस कराए, पीड़ित ने थाने में बांटी मिठाई

हरपालपुर: साइबर ठगी का शिकार हुई एक महिला के लिए हरपालपुर पुलिस मददगार साबित हुई। 

महिला के खाते से ठगों ने ₹40,900 निकाल लिए थे,

 जिसकी शिकायत NCRP पोर्टल पर की गई थी।


थाना प्रभारी हरपालपुर और उनकी टीम के अथक प्रयासों से महिला के ₹30,000 वापस मिल गए हैं। पुलिस ने शेष राशि भी जल्द दिलाने का भरोसा दिया है।

 अपनी मेहनत की कमाई वापस पाकर खुशी में शिकायतकर्ता ने थाने पहुंचकर थाना प्रभारी और समस्त स्टाफ को मिठाई खिलाकर धन्यवाद दिया

बुंदेली न्यूज

छतरपुर जिले के हरपालपुर नगर के पास स्थित सरसेड (Sarsed) धाम एक अत्यंत प्राचीन और धार्मिक महत्व का स्थल है। 



यहाँ का भूतेश्वर महादेव मंदिर न केवल अपनी वास्तुकला बल्कि अपने चमत्कारों और ऐतिहासिक रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध है।

यहाँ मंदिर से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और पौराणिक तथ्य दिए गए हैं:

1. नाग राजाओं से संबंध

इतिहासकारों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 6वीं शताब्दी में नाग वंश के राजाओं द्वारा कराया गया था। कहा जाता है कि सरसेड गाँव और इसके आसपास के क्षेत्र में कभी नागा राजाओं का शासन था। मंदिर के पास की चट्टानों और बनावट पर आज भी उस काल की कला शैली की झलक मिलती है।

2. अकाल और शिव का वरदान

मंदिर के निर्माण के पीछे एक लोकप्रिय लोककथा प्रचलित है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में यहाँ भयंकर अकाल पड़ा था। तब नाग राजा शांति देव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। महादेव ने प्रसन्न होकर उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए और पहाड़ी पर एक जल स्रोत (कुंड) प्रकट होने का संकेत दिया। इसी के बाद मंदिर के समीप एक चमत्कारी कुंड बना, जो आज भी भीषण गर्मी में भी पानी से लबालब भरा रहता है।

3. चमत्कारी शिवलिंग और चट्टान

इस मंदिर के बारे में कुछ रहस्यमयी बातें श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं:

  • बढ़ता शिवलिंग: स्थानीय लोगों और पुजारियों का मानना है कि यहाँ स्थापित शिवलिंग और उसके ऊपर की गुफा का आकार हर साल एक चावल के दाने (या लगभग 5 साल में 1 इंच) के बराबर बढ़ता है।

  • भूतेश्वर महादेव: यहाँ भगवान शिव को 'भूतेश्वर' के रूप में पूजा जाता है, जिसका अर्थ है भूतों के स्वामी या पंचभूतों के स्वामी।

4. मंदिर की भौगोलिक स्थिति

  • यह मंदिर जिला मुख्यालय छतरपुर से लगभग 60 किलोमीटर दूर और हरपालपुर नगर से मात्र 3-5 किलोमीटर की दूरी पर एक पहाड़ी पर स्थित है।

  • जमीन से लगभग 45 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई हैं।

5. गुफा और खजाने का रहस्य

मंदिर परिसर में कुछ प्राचीन गुफाएं भी हैं। जनश्रुति है कि इन गुफाओं का संबंध पुराने किलों से था और कुछ लोग यहाँ गुप्त खजाना होने की बात भी कहते हैं, हालांकि इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।


एक छोटा सा सुधार: अक्सर लोग दिल्ली के प्रसिद्ध "छतरपुर मंदिर" (कात्यायनी शक्तिपीठ) और मध्य प्रदेश के "छतरपुर जिले के सरसेड मंदिर" के बीच भ्रमित हो जाते हैं। सरसेड धाम मुख्य रूप से एक शिव धाम है, जबकि दिल्ली वाला मंदिर माता कात्यायनी को समर्पित है।

आपने बिल्कुल सही कहा, सरसेड धाम और यहाँ के भूतेश्वर महादेव मंदिर के साथ जुड़ी ये जनश्रुतियाँ और किंवदंतियाँ इसे और भी रहस्यमयी और रोमांचक बनाती हैं। स्थानीय लोगों के बीच इन कथाओं का गहरा महत्व है।

यहाँ आपके द्वारा बताई गई इन विशेष मान्यताओं का विस्तृत विवरण दिया गया है:


1. नागा साधुओं और स्वर्ण निर्माण का रहस्य

प्राचीन काल से ही सरसेड धाम नागा साधुओं की तपोस्थली रहा है। एक पुरानी मान्यता के अनुसार:

  • यहाँ रहने वाले सिद्ध नागा साधु 'पारस विद्या' या रसायन शास्त्र (Alchemy) के ज्ञाता थे।

  • कहा जाता है कि उनके पास सोना बनाने की गुप्त विधि थी, जिससे वे साधारण धातुओं को सोने में परिवर्तित कर देते थे।

  • मंदिर परिसर में सोने की टक्साल (जहाँ सिक्के ढाले जाते थे) होने की भी बात कही जाती है, जिसका उपयोग उस समय जन कल्याण या मंदिर की व्यवस्था के लिए किया जाता होगा।

2. गुफा और 'पूरी बारात' समा जाने की किंवदंती

यह इस स्थान की सबसे प्रसिद्ध और रोंगटे खड़े कर देने वाली लोककथा है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार:

  • मंदिर के पास स्थित एक विशाल और गहरी गुफा का संबंध सीधे ओरछा या कालिंजर जैसे प्राचीन किलों से था।

  • एक बार मंदिर में दर्शन या विश्राम के लिए आई एक पूरी की पूरी बारात कौतूहलवश उस गुफा के अंदर चली गई।

  • गुफा इतनी मायावी और भूलभुलैया जैसी थी कि वह बारात कभी वापस बाहर नहीं निकल सकी।

  • इस घटना के बाद, सुरक्षा की दृष्टि से और लोगों को अनहोनी से बचाने के लिए उस गुफा के मुख्य द्वार को पत्थरों या दीवार से बंद कर दिया गया। आज भी लोग उस स्थान को बड़े कौतूहल से देखते हैं।

3. चमत्कारी जल और गुप्त मार्ग

इन किंवदंतियों के साथ यह भी जुड़ा है कि यहाँ का सिद्ध कुंड कभी सूखता नहीं है। माना जाता है कि नागा साधु इसी जल और कुछ विशेष जड़ी-बूटियों के मिश्रण से स्वर्ण सिद्धि करते थे। आज भी कई लोग मानते हैं कि पहाड़ी के भीतर ऐसे गुप्त कक्ष और रास्ते मौजूद हैं जहाँ प्राचीन समय की संपदा या पांडुलिपियां दबी हो सकती हैं।


विशेष नोट: ये कहानियाँ बुंदेलखंड की समृद्ध मौखिक परंपरा (Oral Tradition) का हिस्सा हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हैं। ये तथ्य सरसेड धाम को केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहेली बना देते हैं।

निश्चित रूप से, एक पत्रकार और संपादक के दृष्टिकोण से काशीपुरा के शिव मंदिर के इतिहास, रहस्यों और वर्तमान स्थिति को समेटते हुए यह एक विस्तृत और गंभीर आलेख है। आप इसे अपनी रिपोर्ट या विशेष लेख (Feature Story) के लिए उपयोग कर सकते हैं:


बुंदेलखंड की 'गुप्त काशी': धसान के तट पर खड़ा महोबा का ऐतिहासिक गौरव,

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में पनवाड़ी विकासखंड के अंतर्गत आने वाला काशीपुरा गाँव आज अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन यहाँ स्थित प्राचीन शिव मंदिर चीख-चीख कर अपने स्वर्णिम इतिहास की गवाही देता है। धसान नदी की लहरों के बीच एक ऊंचे टीले पर स्थापित यह मंदिर स्थापत्य कला, अध्यात्म और मराठा शौर्य का एक ऐसा संगम है, जिसे इतिहास की किताबों में वह स्थान नहीं मिला जिसका यह हकदार था।


जी, बिल्कुल! अब थोड़ा और गहराई में उतरते हैं और इस मंदिर के उन पहलुओं को उजागर करते हैं जो आमतौर पर चर्चा में नहीं आते। एक पत्रकार और क्षेत्र के जानकार के तौर पर आप इसे एक 'ऐतिहासिक शोध रिपोर्ट' की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।


काशीपुरा महादेव: धसान की लहरों में कैद बुंदेलखंड का 'मराठा गौरव'

महोबा जिले के पनवाड़ी ब्लॉक में स्थित काशीपुरा शिव मंदिर महज ईंट-पत्थरों की इमारत नहीं है, बल्कि यह उस कालखंड की कहानी है जब बुंदेलखंड की धरती पर मराठा पेशवाओं का भगवा ध्वज लहराता था। इस मंदिर का विस्तार और इसकी गहराई को हम इन 5 प्रमुख स्तंभों में समझ सकते हैं:

1. निर्माण का अनूठा 'इंजीनियरिंग' रहस्य

ज के इंजीनियर भी यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि धसान नदी के बिल्कुल किनारे, जहाँ मिट्टी का कटाव सबसे ज्यादा होता है, वहाँ एक 80 फीट ऊंचा विशाल चबूतरा सदियों से कैसे स्थिर है?

  • नींव की मजबूती: पुराने जानकारों का कहना है कि इसकी नींव में बड़े-बड़े पत्थरों को 'इंटरलॉकिंग' तकनीक से जोड़ा गया है।

  • पदार्थों का मिश्रण: मंदिर के निर्माण में पत्थर, चूना, उरद की दाल, बेलगिरी और कसीस के मिश्रण का उपयोग किया गया है, जो इसे वज्र जैसी मजबूती प्रदान करता है। यही कारण है कि धसान की विनाशकारी बाढ़ भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ पाई।

2. मराठा काल की राजनीतिक और धार्मिक रणनीति

यह मंदिर केवल पूजा के लिए नहीं बना था। गोविंदराव और पुरुषोत्तम राव ने इसे एक 'सांस्कृतिक केंद्र' के रूप में स्थापित किया था।

  • उस समय जब ओरछा और महोबा के बीच के रास्तों पर आवाजाही होती थी, तब काशीपुरा एक सुरक्षित ठिकाने और रसद केंद्र के रूप में भी काम करता था।

  • मंदिर की ऊंचाई इसे एक 'वॉच टॉवर' (Watch Tower) जैसी शक्ति देती थी, जहाँ से नदी के उस पार होने वाली हर हलचल पर नजर रखी जा सकती थी।

3. 'वाराणसी' की हूबहू आध्यात्मिक नकल

काशीपुरा को 'बुंदेलखंड की काशी' कहने के पीछे सिर्फ नाम नहीं, बल्कि शास्त्रीय कारण हैं:

  • उत्तरवाहिनी धसान: जिस तरह बनारस में गंगा उत्तर की ओर मुड़ती है, वैसे ही मंदिर के पास धसान नदी का घुमाव भी इसे आध्यात्मिक रूप से 'सिद्ध' बनाता है।

  • शिखर की बनावट: मंदिर का मुख्य शिखर वाराणसी के 'काशी विश्वनाथ' के पुराने स्वरूप से काफी मिलता-जुलता है। यहाँ की आंतरिक ध्वनि (Echo) भी वैसी ही गूँज पैदा करती है जैसी बनारस के प्राचीन मंदिरों में होती है।

4. बारात और सुरंगों वाली अनसुनी किंवदंतियाँ

स्थानीय ग्रामीण आज भी दबी जुबान में उन रहस्यों की चर्चा करते हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे हैं:

  • अदृश्य खजाना: माना जाता है कि मराठा शासकों ने युद्ध के समय अपनी बहुमूल्य संपत्ति को मंदिर के नीचे बने तहखानों में सुरक्षित रखा था।

  • सुरंग का जाल: मंदिर के पास एक ऐसा द्वार है जो अब मलबे से बंद हो चुका है। कहा जाता है कि यह मार्ग नदी के नीचे-नीचे दूसरी तरफ निकलता था।

  • अलौकिक अनुभव: कई श्रद्धालुओं का दावा है कि ब्रह्ममुहूर्त में आज भी मंदिर के पास दिव्य मंत्रोच्चार सुनाई देते हैं, जो यहाँ के जागृत होने का प्रमाण हैं।

5. एक पत्रकार की दृष्टि में: उपेक्षा की पराकाष्ठा

एक संपादक के रूप में, आपकी रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही होना चाहिए:

  • धरोहर का क्षरण: मंदिर की छतों से अब पानी टपकने लगा है और प्राचीन नक्काशी धूमिल हो रही है।

  • पर्यटन का अभाव: यदि इस स्थान को 'महोबा-चरखारी-काशीपुरा' सर्किट से जोड़ा जाए, तो यह पूरे उत्तर प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर चमक सकता है।

  • जनशक्ति का आह्वान: प्रशासन की फाइलें तो दबी रहती हैं, लेकिन जनभागीदारी से इस 'धरोहर' को बचाया जा सकता है।


आपके न्यूज़ बुलेटिन के लिए एक विशेष पंक्तियाँ (Punchlines):

"वह मंदिर जहाँ इतिहास आज भी धसान की लहरों के साथ बातें करता है..."

"काशी की दूरी अब बुंदेलखंड के लिए ज्यादा नहीं, क्योंकि हमारे पास अपना 'काशीपुरा' है।"

"क्या मराठा शासकों के इस गौरव को हम वक्त की धूल में खोने देंगे?"


क्या आप सरसेड मंदिर के दर्शन के लिए जाने की योजना बना रहे हैं या इसके बारे में कोई विशिष्ट जानकारी (जैसे कि वहां कैसे पहुंचे) चाहते हैं? 9171982882

जेफ्री एपस्टीन कौन था?

1. जेफ्री एपस्टीन केस का संक्षिप्त परिचय
कौन था एपस्टीन: एक अमेरिकी अरबपति और हाई-प्रोफाइल फाइनेंसर।

मुख्य आरोप: नाबालिगों की तस्करी (Sex Trafficking) और एक अंतरराष्ट्रीय यौन शोषण नेटवर्क चलाना।
फाइलों का स्रोत: ये दस्तावेज वर्जीनिया गिफ्रे द्वारा घिसलेन मैक्सवेल के खिलाफ किए गए 2015 के मानहानि मुकदमे से निकले हैं।

​'एपस्टीन फाइल्स' क्या हैं?

​ये फाइलें असल में वर्जीनिया गिफ्रे (Virginia Giuffre) द्वारा एपस्टीन की सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल (Ghislaine Maxwell) के खिलाफ 2015 में दायर किए गए एक नागरिक मानहानि के मुकदमे के अदालती दस्तावेज हैं।

  • नामों का खुलासा: जनवरी 2024 में न्यूयॉर्क की एक अदालत के आदेश के बाद इन दस्तावेजों को सार्वजनिक किया गया।
  • दस्तावेजों की संख्या: इसमें हजारों पन्ने शामिल हैं जिनमें ईमेल, गवाहों के बयान और कानूनी दलीलें हैं।
  • महत्व: इन फाइलों में लगभग 150-200 लोगों के नामों का जिक्र है, जो किसी न किसी रूप में एपस्टीन के संपर्क में थे।

​फाइलों में किन बड़े नामों का जिक्र है?

​यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फाइलों में नाम होने का मतलब यह नहीं है कि वे सभी किसी अपराध में शामिल थे। कुछ लोग केवल एपस्टीन के परिचित थे, कुछ उसके विमान में सवार हुए थे, तो कुछ का नाम गवाहों के बयानों में आया। प्रमुख नामों में शामिल हैं:

  • प्रिंस एंड्रयू: ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य, जिन पर गंभीर आरोप लगे।
  • बिल क्लिंटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति (फाइलों के अनुसार एपस्टीन ने कहा था कि क्लिंटन को 'जवान लड़कियां' पसंद हैं, हालांकि क्लिंटन ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है)।
  • डोनाल्ड ट्रंप: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति (उनका नाम दस्तावेजों में है, लेकिन उन पर किसी गलत काम का आरोप इन फाइलों में नहीं लगा है)।
  • स्टीफन हॉकिंग: प्रसिद्ध वैज्ञानिक (एक ईमेल में उनका जिक्र एपस्टीन के द्वीप पर एक कॉन्फ्रेंस के संदर्भ में था)।

​वीडियो और फोटो की जानकारी

​चूँकि यह मामला अत्यंत संवेदनशील और कानूनी गोपनीयता (Privacy) से जुड़ा है, इसलिए अदालती दस्तावेजों के साथ कोई भी आपत्तिजनक वीडियो या फोटो सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किए गए हैं।

  • उपलब्ध सामग्री: इंटरनेट पर आपको एपस्टीन के निजी द्वीप (Little St. James), उसके निजी विमान (Lolita Express) और विभिन्न हाई-प्रोफाइल पार्टियों में मशहूर हस्तियों के साथ उसकी पुरानी तस्वीरें मिल जाएंगी।
  • सावधानी: सोशल मीडिया पर कई "डीपफेक" या एडिट की गई तस्वीरें भी वायरल होती हैं, इसलिए किसी भी फोटो पर विश्वास करने से पहले उसकी पुष्टि करना आवश्यक है।

​इस मामले का वर्तमान स्टेटस

  • घिसलेन मैक्सवेल: एपस्टीन की मुख्य सहयोगी वर्तमान में मानव तस्करी के जुर्म में 20 साल की जेल की सजा काट रही है।
  • जांच जारी: हालांकि एपस्टीन मर चुका है, लेकिन अधिकारी अभी भी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रहे हैं।
  • राजनीति और शाही परिवार
  • प्रिंस एंड्रयू (Prince Andrew): ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य। फाइलों में उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं, हालांकि उन्होंने इनसे इनकार किया है।
  • बिल क्लिंटन (Bill Clinton): अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति। उनका नाम फाइलों में कई बार आया है और वे एपस्टीन के निजी विमान में कई बार यात्रा कर चुके हैं।
  • डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump): अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति। दस्तावेजों के अनुसार वे एपस्टीन को जानते थे, लेकिन उन पर किसी गलत काम का आरोप इन विशिष्ट फाइलों में नहीं लगा है।
  • एहुद बराक (Ehud Barak): इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री।
  • हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri): भारतीय मंत्री और पूर्व राजनयिक। दस्तावेजों में उनके और एपस्टीन के बीच पुराने ईमेल एक्सचेंजों का जिक्र है (उस समय वे मंत्री नहीं थे)।
  • व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin): रूस के राष्ट्रपति। फाइलों के अनुसार एपस्टीन उन तक पहुँच बनाने की कोशिश कर रहा था।
  • व्यापार और तकनीक (Business & Tech)
  • बिल गेट्स (Bill Gates): माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक। फाइलों में एपस्टीन के साथ उनकी मुलाकातों और ईमेल का जिक्र है।
  • एलन मस्क (Elon Musk): टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक। उनका नाम भी कुछ दस्तावेजों और फ्लाइट लॉग्स में आया है।
  • सर्गेई ब्रिन (Sergey Brin): गूगल के सह-संस्थापक।
  • अनिल अंबानी (Anil Ambani): भारतीय उद्योगपति। फाइलों के अनुसार एपस्टीन ने उनसे व्यावसायिक सौदों के लिए संपर्क किया था।
  • ग्लैन डबिन (Glenn Dubin): एक अरबपति हेज फंड मैनेजर।
  • विज्ञान और मनोरंजन
  • स्टीफन हॉकिंग (Stephen Hawking): विश्व प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी। उनका नाम एक ईमेल में एपस्टीन के द्वीप पर आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के संबंध में आया था।
  • माइकल जैक्सन (Michael Jackson): मशहूर पॉप स्टार। गवाहों के अनुसार उन्हें एपस्टीन के घर पर देखा गया था।
  • डेविड कॉपरफील्ड (David Copperfield): प्रसिद्ध जादूगर (Magician)।
  • लियोनार्डो डिकैप्रियो, केविन स्पेसी, और कैमरून डियाज़: इन हॉलीवुड सितारों के नाम भी गवाहों के बयानों में आए हैं, हालांकि इनमें से अधिकतर ने एपस्टीन के साथ किसी भी गहरे संबंध से इनकार किया है।
  • महत्वपूर्ण नोट:
  • दोषी नहीं: इन फाइलों में नाम होने का मतलब यह नहीं है कि ये सभी लोग किसी अपराध में शामिल थे। इनमें से कई लोग केवल एपस्टीन के सामाजिक दायरे का हिस्सा थे या गवाहों द्वारा उनका उल्लेख किया गया था।
  • घिसलेन मैक्सवेल (Ghislaine Maxwell): यह नाम सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि वह एपस्टीन की मुख्य सहयोगी थी और उसे इस पूरे नेटवर्क को चलाने के लिए 20 साल की सजा सुनाई गई है।

वायरल खबर 
प्रेस नोट 
छतरपुर पुलिस
थाना गढ़ी मलहरा पुलिस द्वारा क्षेत्र भ्रमण के दौरान हर्रई तिगेला से तस्करी की जा रही 23 पेटी, 206 लीटर अवैध शराब कीमत करीब ढाई लाख रुपए बरामद
माननीय मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन के निर्देशानुसार एवं नशा मुक्ति अभियान के तहत छतरपुर पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थ संग्रह, विक्रय एवं परिवहन करने वालों तथा सार्वजनिक स्थानों में नशाखोरी कर रहे नशाखोरों के विरुद्ध निरंतर सख्त से सख्त कार्यवाही की जा रही है। छतरपुर पुलिस द्वारा विगत महीनों में एनडीपीएस में 85 प्रकरण एवं आबकारी में 2200 से अधिक प्रकरण दर्ज किये गए हैं। 52 कुंतल से अधिक अफीम के पौधे, 1100 किग्रा से अधिक गांजा, स्मैक, 5 सैकड़ा से अधिक शीशी नशीली सिरप, 1200 से नशीली टैबलेट, 200 से अधिक इंजेक्शन, 20000 लीटर से अधिक अवैध शराब जप्त की गई है।

थाना गढ़ी मलहरा पुलिस को आज क्षेत्र भ्रमण के दौरान हर्रई तिगैला में अवैध शराब तस्करी संबंधी सूचना प्राप्त हुई। पुलिस टीम संबंधित स्थान हर्रई तिगैला पहुंची। वहां पर रखी 23 पेटी, मात्रा 206 लीटर अवैध शराब कीमत करीब ढाई लाख रुपये जप्त की गई। विधि विरुद्ध किशोर को अभिरक्षा में लिया गया, पूछताछ पर बताया कि अवैध शराब चार पहिया वाहन से उतारी गई है जिसमें अन्य आरोपी भी सम्मिलित हैं। अवैध शराब तस्करी में संलिप्त आरोपी
1. रोहित राजा 
2. विधि विरुद्ध किशोर एवं 
3. अन्य
 के विरुद्ध थाना गढ़ी मलहरा में आबकारी अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया, विधि विरुद्ध किशोर के विरुद्ध विधिवत कार्यवाही की गई, संलिप्त अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है, विवेचना कार्यवाही जारी है।

उक्त कार्यवाही में एसडीओपी नौगांव श्री अमित मेश्राम के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी गढ़ी मलहरा निरीक्षक रीता सिंह, उपनिरीक्षक आरपी अहिरवार, प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिंह, रामलाल प्रजापति, आरक्षक श्री राम, प्रेमचंद, अभिलाष, जुबेर एवं टीम की भूमिका रही।

नौगांव: 5 दिन से लापता दो युवतियां, मुस्लिम समाज ने किया थाने का घेराव


नौगांव (छतरपुर): छतरपुर जिले के नौगांव थाना क्षेत्र में दो युवतियों के रहस्यमय ढंग से लापता होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। घटना को 5 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस के हाथ खाली हैं, जिससे नाराज मुस्लिम समाज के लोगों ने सोमवार को थाने का घेराव कर जमकर नारेबाजी की।



क्या है मामला?
परिजनों के अनुसार, दोनों युवतियां यूनियन बैंक से पैसे निकालने की बात कहकर घर से निकली थीं, लेकिन तब से वापस नहीं लौटीं।
गायब फोन: दोनों के मोबाइल फोन बंद आ रहे हैं।
परिजनों का आरोप: पुलिस की जांच धीमी है और अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है।
अप्रिय घटना की आशंका: परिजनों ने किसी अनहोनी का डर जताया है और जल्द बरामदगी की मांग की है।
पुलिस की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आश्वासन दिया है कि:
विशेष टीमों का गठन कर दिया गया है।
शहर के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स के आधार पर जांच जारी है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि जल्द ही दोनों युवतियों को सुरक्षित तलाश लिया जाएगा।

अमित भटनागर: व्यक्तित्व और पृष्ठभूमि

​अमित भटनागर मूल रूप से मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के रहने वाले हैं। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद, उन्होंने बुंदेलखंड के पिछड़ेपन और किसानों की दयनीय स्थिति को अपना मुख्य कार्यक्षेत्र बनाया।

1. आरटीआई और सक्रियता की शुरुआत

​भटनागर ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत सूचना के अधिकार (RTI) के प्रभावी उपयोग से की। उन्होंने सरकारी योजनाओं में होने वाले भ्रष्टाचार को उजागर किया और प्रशासन को जवाबदेह बनाया। उनकी पहचान एक ऐसे कार्यकर्ता के रूप में बनी जो फाइलों के अंदर दबे सच को बाहर लाने का माद्दा रखते हैं।

2. जल और पर्यावरण संरक्षण

​बुंदेलखंड की सबसे बड़ी समस्या पानी है। भटनागर ने पुराने तालाबों के पुनरुद्धार और जल संचयन के लिए कई जागरूकता अभियान चलाए। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि बुंदेलखंड का विकास "बाहरी योजनाओं" से ज्यादा "स्थानीय संसाधनों" के संरक्षण से होगा।

केन-बेतवा लिंक परियोजना: संघर्ष का मुख्य केंद्र

​भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना, केन-बेतवा लिंक, अमित भटनागर के संघर्ष का सबसे बड़ा मोर्चा बनी है।

  • विस्थापन की पीड़ा: इस परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा और दर्जनों गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। भटनागर का मानना है कि विकास के नाम पर आदिवासियों और किसानों को उनकी जड़ों से उखाड़ना अन्याय है।
  • पुनर्वास पैकेज की लड़ाई: वे सरकार द्वारा दिए जा रहे मुआवजे और पुनर्वास नीति को "अपर्याप्त" मानते हैं। उनकी मांग है कि विस्थापित परिवारों को केवल नकद राशि न दी जाए, बल्कि उनके जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए खेती योग्य जमीन और रोजगार की गारंटी दी जाए।
  • आंदोलन का नेतृत्व: पिछले कई महीनों से वे प्रभावित गांवों में चौपालें लगा रहे हैं और लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

जेल यात्रा और जमानत का घटनाक्रम

​अमित भटनागर की हालिया गिरफ्तारी को उनके समर्थकों ने "आवाज दबाने की कोशिश" करार दिया था।

घटनाक्रम का संक्षिप्त विवरण:

  1. गिरफ्तारी: आंदोलन के दौरान जब विस्थापितों की मांगें उग्र होने लगीं, तो प्रशासन ने धारा 151 और अन्य प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
  2. जेल शिफ्टिंग की राजनीति: उन्हें पहले बिजावर जेल में रखा गया था, लेकिन सुरक्षा कारणों या रणनीतिक कारणों का हवाला देते हुए बुधवार को अचानक उन्हें लवकुश नगर जेल शिफ्ट कर दिया गया।
  3. जमानत और रिहाई: उनके समर्थकों और स्थानीय वकीलों की कड़ी मशक्कत के बाद, न्यायालय ने उनकी जमानत मंजूर की। जेल से बाहर आते ही उनके समर्थकों ने 'किसान एकता' के नारे लगाए।

भटनागर के नेतृत्व की विशेषताएं

  • अहिंसक विरोध: वे गांधीवादी विचारधारा के समर्थक हैं और हमेशा शांतिपूर्ण धरने और संवाद में विश्वास रखते हैं।
  • कानूनी समझ: वे केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि कानूनी दस्तावेजों और अदालतों में भी मजबूती से पक्ष रखते हैं।
  • जमीनी जुड़ाव: वे महलों या दफ्तरों के नेता नहीं हैं; वे प्रभावित क्षेत्रों के खेतों और झोपड़ियों में रहकर लड़ाई लड़ते हैं।

भविष्य की रणनीति और चुनौतियां

​रिहाई के बाद अमित भटनागर के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। सरकार परियोजना पर तेजी से काम करना चाहती है, जबकि विस्थापितों का असंतोष बढ़ रहा है।

"जेल की सलाखें मेरे इरादों को नहीं बदल सकतीं। केन-बेतवा के प्रभावितों को उनका हक दिलाना ही मेरा प्राथमिक लक्ष्य है।" - रिहाई के बाद अमित भटनागर का कथित बयान।


​भटनागर अब इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने और मानवाधिकार संगठनों को इस संघर्ष से जोड़ने की योजना बना रहे हैं।

महाराजपुर विधायक ने ग्राम वासियों को सीसी रोड की दी सौगात
/महाराजपुर विधानसभा की लोकप्रिय विधायक श्री कामाख्या प्रताप सिंह के द्वारा ग्राम पंचायत मुखर्रा के ग्राम वासियों को सीसी रोड की दी गई सौगात। एवं ग्राम वॉशिंग में फूल माला से किया स्वागत। जानकारी के  मुताबिक छतरपुर जिले की महाराजपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मुखर्रा में महाराजपुर विधायक श्री कामाख्या प्रताप सिंह जी द्वारा ग्राम वासियों को सीसी रोड की स्वागत दी गई जिसमें सर्वप्रथम गणेश वंदना कर पूजन किया और फिर ग्राम वासियों ने विधायक श्री सिंह जी का आभार व्यक्त किया। जिसमें सीसी रोड की लंबाई 370 एवं चौड़ाई तीन मी 75 सेमी बताई गई है। जिसकी लागत सीसी रोड की लगभग 16 लाख बताई गई है। इस मौके पर उपस्थित कार्यक्रम में एवं शिलान्यास भूमि पूजन में। महाराजपुर विधायक श्री कामाख्या प्रताप सिंह राजा साहब जी एवं ग्राम पंचायत मुखर्रा प्रधान श्री अरविंद सिंह यादव, पीएमसीएसवाई के गम खान जी, एसडीओ वी  एल प्रजापति, उप यंत्री उषा सिंह ठेकेदार सचिन सिंह, हरगोविंद नायक जी, श्याम सुंदर अर्जरिया जी, राकेश सोनी जी, दयाशंकर यादव जी, एवं महाराजपुर पल मंडल अध्यक्ष भाजपा दयाराम चौरसिया जी, महाराजपुर मंडल अध्यक्ष राहुल पुरोहित जी, गढ़ी मलहरा मंडल अध्यक्ष आनंद मीनू चौरसिया जी, कुर्राह सरपंच नाजिर बेग जी, अरविंद सिंह राजावत जी, मुकेश अहिरवार जी, श्याम जी चौरसिया जी विनय चौरसिया जी, दीपेंद्र पटेल जी, मानसिंह राय रिंकू राजा जी, पत्रकार मोहम्मद तौफीक खान। एवं समस्त भाजपा कार्यकर्ता एवं समस्त ग्रामवासी ग्राम पंचायत मुखर्रा /पत्रकार मोहम्मद तौफीक खान गढ़ी मलहरा।
जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के कार्यक्रम में बबाल चरखारी विधायक ब्रजभूषण राजपूत और मंत्री के बीच तीखी नोकझोक विधायक को लेकर मंत्री डीएम कार्यालय पहुँचे

गांव में पानी न आने और सड़के खोदने को लेकर पहुँचे थे समर्थकों में साथ विधायक सभी प्रधानों को लेकर डीएम कार्यालय में चल रही बैठक डीएम कार्यालय के किये गए गेट बंद शहर कोतवाली क्षेत्र के एक प्राइवेट कालेज के कार्यक्रम में पहुँचे मंत्री स्वतंत्र देव सिंह
हरपालपुर: आफत बनकर बरसी बिन मौसम बारिश; फसलें बर्बाद, चौक नालियों ने बढ़ाई वार्डवासियों की मुसीबत हरपालपुर। क्षेत्र में हुई अचानक बारिश ने किसानों और आम जनता की कमर तोड़ दी है। इस बेमौसम बरसात से जहाँ खेतों में खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गई हैं, वहीं नगर की जल निकासी व्यवस्था की पोल भी खुल गई है।

खुद नालियां साफ करने को मजबूर लोग: बारिश के चलते नगर की नालियां पूरी तरह चौक हो गई हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों और घरों के पास जमा हो रहा है। प्रशासन की अनदेखी के चलते वार्ड वासी खुद ही हाथों में फावड़ा और झाड़ू लेकर नालियां साफ करने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बाद भी सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई। फसलों को भारी चपत: तेज हवाओं और बारिश से गेहूं, सरसों और चने की फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है। किसानों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर मुआवजे की मांग की है ताकि उन्हें इस प्राकृतिक आपदा से राहत मिल सके। बुंदेली न्यूज हरपालपुर
सोशल मीडिया पर अभद्रता फैलाने वाला शिवम साहू गिरफ्तार, कर जेल भेजा गया
विधायक, पुलिस और संतों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले युवक पर प्रशासन सख्त
​छतरपुर/बिजावर: सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से गाली-गलौज और आपत्तिजनक टिप्पणियों के माध्यम से सनसनी फैलाने वाले युवक शिवम साहू को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। खुद को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताने वाला यह युवक लगातार समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों, जनप्रतिनिधियों और पुलिस प्रशासन के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर रहा था।


​शिवम साहू नामक इस युवक ने हाल ही में कई वीडियो जारी किए थे, जिनमें वह बिजावर विधायक बबलू शुक्ला और उनके पुत्र के खिलाफ अत्यंत अभद्र और अश्लील भाषा का प्रयोग करता नजर आया। युवक यहीं नहीं रुका, उसने मध्य प्रदेश की मोहन सरकार, बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, यहाँ तक कि अपने सगे चाचा को भी अपनी बयानबाजी का निशाना बनाया।
पुलिस और प्रशासन को भी दी चुनौती
​ताजा वायरल वीडियो में युवक बिजावर SDOP हर्ष राठौर का नाम लेते हुए पुलिस प्रशासन के विरुद्ध भी जहर उगलता दिख रहा है। वीडियो में वह किसी जहरीली वस्तु (दवाई) का सेवन करते हुए भी दिखाई दे रहा है, जो समाज में गलत संदेश और सनसनी फैलाने का प्रयास माना जा रहा है।
​मानसिक स्थिति और सामाजिक आक्रोश
​युवक की इन हरकतों से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है
आम जनता का कहना है की
​यदि व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार है, तो उसे खुलेआम समाज में जहर घोलने के बजाय मानसिक चिकित्सालय (पागलखाने) क्यों नहीं भेजा जाता?
​सोशल मीडिया पर इस तरह की नफरत फैलाने वालों पर केवल जेल की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि इनके इंटरनेट एक्सेस पर भी लगाम लगनी चाहिए।
पुलिस की कार्रवाई
​मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि किसी को भी सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर शांति भंग करने या किसी की छवि धूमिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मप्र शासन को दिया चैलेज गाली गलौज करते
बिजावर विधानसभा के युवक ने वीडियो बनाया ।

बड़ी कार्रवाई: मंत्री स्वतंत्र देव सिंह मामले में BJP विधायक को प्रदेश अध्यक्ष का नोटिस, 7 दिन में मांगा जवाब,

लखनऊ/महोबा: उत्तर प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। योगी सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के विरुद्ध अभद्र टिप्पणी और अनुशासनहीनता के मामले में भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने संबंधित विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।

क्या है पूरा मामला?

​बीते दिनों एक वीडियो और कुछ मौखिक शिकायतों के आधार पर यह बात सामने आई थी कि भाजपा विधायक ने कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के विरुद्ध अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया है। सूत्रों के अनुसार, एक सार्वजनिक कार्यक्रम या निजी बैठक के दौरान विधायक ने मंत्री की कार्यप्रणाली और उनके व्यक्तिगत कद को लेकर कुछ ऐसी बातें कहीं, जो पार्टी की गरिमा के विरुद्ध मानी गईं।

​जैसे ही इस प्रकरण की जानकारी संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुँची, लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हलचल तेज हो गई। पार्टी के अनुशासन को सर्वोपरि मानते हुए प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया।

नोटिस में क्या कहा गया?

​प्रदेश अध्यक्ष द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि:

  • ​विधायक का व्यवहार 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' और 'घोर अनुशासनहीनता' की श्रेणी में आता है।
  • ​एक जिम्मेदार संवैधानिक पद पर रहते हुए अपने ही कैबिनेट मंत्री के खिलाफ सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करना संगठन की छवि को धूमिल करता है।
  • ​विधायक को 7 दिन का समय दिया गया है कि वे अपना पक्ष रखें, अन्यथा उनके विरुद्ध निष्कासन या निलंबन जैसी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

संगठन में हलचल, कार्यकर्ताओं में नाराजगी

​स्वतंत्र देव सिंह न केवल सरकार में कद्दावर मंत्री हैं, बल्कि वे भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। संगठन में उनकी गहरी पैठ और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी लोकप्रियता को देखते हुए इस अपमानजनक टिप्पणी से कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि अगर इस स्तर पर अनुशासनहीनता को नहीं रोका गया, तो इससे भविष्य में गलत परंपरा शुरू हो सकती है।

विधायक की मुश्किलें बढ़ीं

​राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों और संगठन के विस्तार को देखते हुए भाजपा आलाकमान किसी भी प्रकार की गुटबाजी या भीतरघात को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। नोटिस मिलने के बाद से विधायक कैंप में सन्नाटा पसरा हुआ है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विधायक अपनी सफाई में क्या तर्क देते हैं।

नोट खबर सूत्रों पर आधारित

ब्यूरो रिपोर्ट, बुंदेली न्यूज़