श्राद्ध श्रद्धा का पर्व है जिसमें श्रद्धा से मानव कृतज्ञ होता है अपने पूर्वजों का - बी.के आशा,

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ब्रह्माकुमारीज -- श्राद्ध का आध्यात्मिक महत्व पूर्वजों का आशीर्वाद,


श्राद्ध श्रद्धा का पर्व है जिसमें श्रद्धा से मानव कृतज्ञ होता है अपने पूर्वजों का - बी.के आशा,

 ब्रह्माकुमारीज  हरपालपुर आश्रम पर पितृपक्ष के  दोनों में विशेष अपने पूर्वजों पितरों के सम्मान में सच्ची श्रद्धांजलि के, रूप में उनके गुणों और कर्तव्यों को अपनाने का लिया संकल्प। 

हरपालपुर ब्रह्माकुमारी आश्रम प्रभारी ब्रह्माकुमारी आशा दीदी ने पितृपक्ष के बारे में आध्यात्मिक विचार रखें, ,उन्होंने कहा
 हम आभारी हैं अपने उन पूर्वजों के लिए जिन्होंने उसे समाज दिया जिन्होंने एक समझ दी,जिन्होंने समाज में संबंध दिए हमारे पैरों के नीचे जो जमीन है वह हमारे पूर्वजों की जमीन है और वैसे भी हमारी संस्कृति है धन्यवाद व्यक्त करने की तो हम आभारी हैं और पूर्वजों के लिए,और यह आभार व्यक्त करने का पर्व है श्राद्ध। जाने अनजाने में कई गलतियां के लिए सच्चे दिल से क्षमा मांगते हैं और स्वयं में प्रायश्चित करते हुए परिवर्तन का  संकल्प करते हैं अपने पूर्वजों के गुण और कर्तव्यों को याद करते हुए उनसे प्रेरणा प्राप्त करते हैं आगे के जीवन के लिए । कहा जाता है कि जब इतनी श्रद्धा के साथ शुभ संकल्प करके श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं तो अवश्य अपने पूर्वजों के आशीर्वाद का अनुभव हम प्राप्त कर सकते हैं जहां श्रद्धा नहीं वहां   श्राद नहीं वहां मजबूरी होती है परंपरागत  व्यवस्ता होती है और भावनात्मक औपचारिकता होती है  वास्तव में आज हमारे पास जो कुछ भी है हमारे  संस्कारों के रूप में समृद्धि के रूप में गौरव के रूप में यह हमारे पूर्वजों की ही देन है  तो हम प्यार से उन्हें भूख स्वीकार करें और अच्छे कर्म करें जिससे उन्हें सदा खुशी अनुभव हो और हमें भी उनसे दुआएं प्राप्त होती रहे।

कुलदीप वर्मा बुंदेली न्यूज हरपालपुर

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