झांसी मंडल के टिकट जांच स्टाफ की सतर्कता: घर से भागे दो नाबालिगों को गरीब रथ एक्सप्रेस में मिला सुरक्षित संरक्षण,
झांसी/भोपाल: भारतीय रेल के कर्मचारियों ने एक बार फिर अपनी कर्तव्यनिष्ठा के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं का परिचय दिया है। झांसी मंडल के एक सजग टिकट जांच निरीक्षक की सूझबूझ से दो नाबालिग बच्चों को गलत राह पर जाने से बचाकर सुरक्षित संरक्षण में लिया गया।
क्या है पूरा मामला?
दिनांक 11 मई 2026 को गाड़ी संख्या 12612 (मद्रास गरीब रथ एक्सप्रेस) में श्री परमानंद, उप मुख्य टिकट निरीक्षक (D-CTI), झांसी, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्टेशन से भोपाल तक अपनी ड्यूटी पर तैनात थे।
नियमित टिकट जांच के दौरान, जब वे कोच संख्या G-10 में पहुंचे, तो उनकी नज़र गैलरी में बैठे दो किशोरों पर पड़ी। उनकी उम्र लगभग 14 और 16 वर्ष थी। दोनों बच्चे काफी डरे हुए और घबराए हुए दिख रहे थे।
पूछताछ में हुआ खुलासा
श्री परमानंद द्वारा टिकट मांगने पर बच्चों ने बताया कि उनके पास कोई वैध टिकट नहीं है। जब उनसे विश्वास में लेकर पूछताछ की गई, तो बच्चों ने चौंकाने वाला खुलासा किया:
वे घरेलू परिस्थितियों से तंग आकर बिना बताए घर से भाग निकले थे।
उनका इरादा ट्रेन से चेन्नई जाने का था।
त्वरित कार्रवाई और सुरक्षित रेस्क्यू
मामले की गंभीरता और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए, श्री परमानंद ने बिना देरी किए भोपाल मंडल नियंत्रण कार्यालय को सूचित किया। उन्होंने रेल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखा।
जैसे ही ट्रेन भोपाल स्टेशन पहुंची, श्री परमानंद ने तत्परता दिखाते हुए दोनों बच्चों को रेलवे सुरक्षा बल (RPF), भोपाल के सुपुर्द कर दिया। RPF ने बच्चों को अपनी कस्टडी में लेकर उनके परिजनों से संपर्क करने और उन्हें सकुशल घर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
"यह घटना न केवल रेलवे स्टाफ की सतर्कता को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि रेल कर्मचारी यात्रियों की सुरक्षा और सामाजिक सरोकारों के प्रति कितने सजग हैं।" — झांसी रेल मंडल प्रशासन
प्रशासन ने की सराहना
झांसी मंडल द्वारा श्री परमानंद की इस उत्कृष्ट कार्यकुशलता और संवेदनशीलता की सराहना की गई है। उनके इस प्रयास ने न केवल दो मासूमों का भविष्य सुरक्षित किया, बल्कि रेल विभाग का मान भी बढ़ाया है।
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